Remedywala

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Shri Gauri Nandan Aarti | ॐ गणेश जय गौरी नंदन | Ganpati Aarti

ॐ गणेश जय गौरी नंदन ॐ जय गौरी नंदन, प्रभु जय गौरी नंदन गणपति विघ्न निकंदन, मंगल निःस्पंदन || ॐ जय || ऋद्धि सिद्धियाँ जिनके, नित ही चंवर करे करिवर मुख सुखकारक, गणपति विघ्न हरे || ॐ जय || देवगणों में पहले तव पूजा होती तब मुख छवि भक्तो के निदारिद खोती || ॐ जय || गुड़ का भोग लगत हैं कर मोदक सोहे ऋद्धि सिद्धि सह-शोभित, त्रिभुवन मन मोहै || ॐ जय || लंबोदर भय हारी, भक्तो के त्राता मातृ-भक्त हो तुम्ही, वाँछित फल दाता || ॐ जय || मूषक वाहन राजत, कनक छत्रधारी विघ्नारण्यदवानल, शुभ मंगलकारी || ॐ जय || धरणीधर कृत आरती गणपति की गावे सुख संपत्ति युक्त होकर वह वांछित पावे || ॐ जय || Gauri

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Lakshman Aarti | लक्ष्मण जी की आरती | Ram Lakshman Aarti in English

लक्ष्मण जी की आरती आरती लक्ष्मण बालजती की असुर संहारन प्राणपति की जगमग ज्योति अवधपुर राजे शेषाचल पै आप विराजे घंटा ताल पखावज बाजे कोटि देव मुनि आरती साजे किरीट मुकुट कर धनुष विराजे तीन लोक जाकी शोभा राजे कंचन थार कपूर सुहाई आरती करत सुमित्रा माई आरती कीजे हरी की तैसी ध्रुव प्रहलाद विभीषण जैसी प्रेम मगन होय आरती गावै बसि वैकुण्ठ बहुरि नहीं आवै भक्ति हेतु हरि ध्यान लगावै जन घनश्याम परमपद पावै Lakshman Aarti Aarti Lakshman Baaljati Ki Asur Sanhaaran Praanpati Ki Jagmag Jyoti Avadhpur Raaje Sheshachal Pai Aap Viraaje Ghanta Taal Pakhawaj Baaje Koti Dev Muni Aarti Saaje Kirit Mukut Kar Dhanush Viraaje Teen Lok Jaaki Shobha Raaje Kanchan Thar Kapoor Suhaai Aarti Karat Sumitra Mai

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Chamunda Devi Aarti | माँ चामुण्डा देवी जी की आरती | Chamunda Mata Ki Aarti

माँ चामुण्डा देवी जी की आरती जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति । तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥ मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥ कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥ केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी । सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥ कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥ शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥ चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू। बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥ भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी। मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥ कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती । श्री मालकेतु

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Yogmaya devi Aarti | मां योगमाया की आरती | Maa Yogmaya

मां योगमाया की आरती ॐ जय माँ योगमाया ॐ जय श्री योगमाया । भक्त जनों को अपने… दे शीतल छाया ॥ ॐ जय श्री… तुम देवी कुलरक्षक ग्वालों की दाती । कल्याणी कष्टों को… क्षण में दूर करती ॥ ॐ जय श्री… तुम हो शक्ति धरा की महिमा हो नग की । पूर्ण हो करती इच्छा… तुम सबके मन की ॥ ॐ जय श्री… हम पर कृपा सदा हो मैय्या ये वर दो । दर्शन दो हे माता… हमें धन्य कर दो ॥ ॐ जय श्री … भक्त जनों को अपने… दे शीतल छाया ॥ ॐ जय श्री… ॥ इति मां योगमाया आरती संपूर्णम् ॥ Yogmaya Devi Aarti Om Jai Maa Yogmaya Om Jai Shree Yogmaya . Bhakt Jano Ko

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Maa Brahmacharini Aarti | मां ब्रह्माचारिणी की आरती | Brahmacharini mantra

मां ब्रह्माचारिणी की आरती जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता । जय चतुरानन प्रिय सुख दाता ॥ ब्रह्मा जी के मन भाती हो । ज्ञान सभी को सिखलाती हो ॥ ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा । जिसको जपे सकल संसारा ॥ जय गायत्री वेद की माता । जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता ॥ कमी कोई रहने न पाए । कोई भी दुख सहने न पाए ॥ उसकी विरति रहे ठिकाने । जो ​तेरी महिमा को जाने ॥ रुद्राक्ष की माला ले कर । जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर ॥ आलस छोड़ करे गुणगाना । मां तुम उसको सुख पहुंचाना ॥ ब्रह्माचारिणी तेरो नाम । पूर्ण करो सब मेरे काम ॥ भक्त तेरे चरणों का पुजारी । रखना लाज मेरी महतारी

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Chandraghanta Mata ki Aarti | मां चंद्रघंटा की आरती | Durga Aarti

मां चंद्रघंटा की आरती जय मां चंद्रघंटा सुख धाम । पूर्ण कीजो मेरे सभी काम ॥ चंद्र समान तुम शीतल दाती । चंद्र तेज किरणों में समाती ॥ क्रोध को शांत करने वाली । मीठे बोल सिखाने वाली ॥ मन की मालक मन भाती हो । चंद्र घंटा तुम वरदाती हो ॥ सुंदर भाव को लाने वाली । हर संकट मे बचाने वाली ॥ हर बुधवार जो तुझे ध्याये । श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं ॥ मूर्ति चंद्र आकार बनाएं । सन्मुख घी की ज्योति जलाएं ॥ शीश झुका कहे मन की बाता । पूर्ण आस करो जगदाता ॥ कांचीपुर स्थान तुम्हारा । करनाटिका में मान तुम्हारा ॥ नाम तेरा रटूं महारानी । भक्त की रक्षा करो भवानी ॥ ॥

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Kushmanda mata ki Aarti | मां कूष्मांडा की आरती | durga Aarti

मां कूष्मांडा की आरती कूष्मांडा जय जग सुखदानी । मुझ पर दया करो महारानी ॥ पिगंला ज्वालामुखी निराली । शाकंबरी मां भोली भाली ॥ लाखों नाम निराले तेरे । भक्त कई मतवाले तेरे ॥ भीमा पर्वत पर है डेरा । स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ॥ सबकी सुनती हो जगदम्बे । सुख पहुंचती हो मां अम्बे ॥ तेरे दर्शन का मैं प्यासा । पूर्ण कर दो मेरी आशा ॥ मां के मन में ममता भारी । क्यों ना सुनेगी अरज हमारी ॥ तेरे दर पर किया है डेरा । दूर करो मां संकट मेरा ॥ मेरे कारज पूरे कर दो । मेरे तुम भंडारे भर दो ॥ तेरा दास तुझे ही ध्याए । भक्त तेरे दर शीश झुकाए ॥ Kushmanda mata

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Skandmata Devi ki Aarti | मां स्कंदमाता की आरती | skandmata mantra

मां स्कंदमाता की आरती जय तेरी हो स्कंदमाता । पांचवां नाम तुम्हारा आता ॥ सब के मन की जानन हारी । जग जननी सब की महतारी ॥ तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं । हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं ॥ कई नामों से तुझे पुकारा । मुझे एक है तेरा सहारा ॥ कहीं पहाड़ों पर हैं डेरा । कई शहरो में तेरा बसेरा ॥ हर मंदिर में तेरे नजारे । गुण गाए तेरे भक्त प्यारे ॥ भक्ति अपनी मुझे दिला दो । शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो ॥ इंद्र आदि देवता मिल सारे । करे पुकार तुम्हारे द्वारे ॥ दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए । तुम ही खंडा हाथ उठाएं ॥ दास को सदा बचाने आईं । ‘चमन’ की आस

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Maa Katyayani Aarti | मां कात्यायनी की आरती | Devi Katyayani Aarti

मां कात्यायनी की आरती जय जय अम्बे, जय कात्यायनी । जय जगमाता, जग की महारानी ॥ बैजनाथ स्थान तुम्हारा । वहां वरदाती नाम पुकारा ॥ कई नाम हैं, कई धाम हैं । यह स्थान भी तो सुखधाम है ॥ हर मंदिर में जोत तुम्हारी । कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी ॥ हर जगह उत्सव होते रहते । हर मंदिर में भक्त हैं कहते ॥ कात्यायनी रक्षक काया की । ग्रंथि काटे मोह माया की ॥ झूठे मोह से छुड़ाने वाली । अपना नाम जपाने वाली ॥ बृहस्पतिवार को पूजा करियो । ध्यान कात्यायनी का धरियो ॥ हर संकट को दूर करेगी । भंडारे भरपूर करेगी ॥ जो भी मां को भक्त पुकारे । कात्यायनी सब कष्ट निवारे ॥ Maa Katyayani Aarti

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Shri Kuber Bhagwan Aarti | श्री कुबेर जी की आरती

श्री कुबेर जी की आरती ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जै यक्ष कुबेर हरे । शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे… शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े । दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे… स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे । योगिनी मंगल गावैं, सब जय जय कार करैं ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे… गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे । दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करें ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे… भांति भांति के, व्यंजन बहुत बने । मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने ॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे… बल बुद्धि विद्या दाता, हम तेरी शरण पड़े

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Chamunda Devi Aarti | माँ चामुण्डा देवी जी की आरती | Chamunda Mata Ki Aarti

माँ चामुण्डा देवी जी की आरती जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति । तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥ मांग सिंदूर बिराजत

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