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    Gau Mata Aarti | गौमाता की आरती | जय गौ माता

    गौमाता की आरती आरती श्री गैया मैया की आरती हरनि विश्वधैया की || अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी, अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी || सुर मानव सौभाग्याविधायिनी, प्यारी पूज्य नन्द छैया की || अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता, मधुर अमिय दुग्धान्न प्रब्दाता || रोग शोक संकट परित्राता, भवसागर हित दृढ़ नैया की || आयु ओज आरोग्यविकाशिनी, दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी || सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी, विमल विवेक बुद्धि दैया की || सेवक हो चाहे दुखदाई, सा पय सुधा पियावति माई || शत्रु-मित्र सबको सुखदायी, स्नेह स्वभाव विश्व जैया की || Gau Mata Aarti Aarti Shri Gaiya Maiya Ki, Aarti Harni Viswadhaiya Ki Arthkaam Saddharm Pradaayini, Avichal Amal Muktipadyaini Sur Maanav Saubhagyavidhayini, Pyaari Pujya Nand Chaiya Ki Akhil Vishwa Pratipaalini Maata, Madhur Amiy Dugdhanan Prabdaata Rog

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    shri balaji ki aarti | श्री बालाजी आरती | shri salasar balaji ki aarti

    श्री बालाजी आरती ॐ जय हनुमत वीरा स्वामी जय हनुमत वीरा संकट मोचन स्वामी तुम हो रनधीरा ||ॐ जय || पवन पुत्र अंजनी सूत महिमा अति भारी दुःख दरिद्र मिटाओ संकट सब हारी ||ॐ जय || बाल समय में तुमने रवि को भक्ष लियो देवन स्तुति किन्ही तुरतहिं छोड़ दियो ||ॐ जय || कपि सुग्रीव राम संग मैत्री करवाई अभिमानी बलि मेटयो कीर्ति रही छाई ||ॐ जय || जारि लंक सिय-सुधि ले आए, वानर हर्षाये कारज कठिन सुधारे, रघुबर मन भाये ||ॐ जय || शक्ति लगी लक्ष्मण को, भारी सोच भयो लाय संजीवन बूटी, दुःख सब दूर कियो ||ॐ जय || रामहि ले अहिरावण, जब पाताल गयो ताहि मारी प्रभु लाय, जय जयकार भयो ||ॐ जय || राजत मेहंदीपुर में,

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    Shri Vishwakarma Aarti | श्री विश्वकर्मा जी की आरती | विश्वकर्मा पूजा आरती

    श्री विश्वकर्मा जी की आरती जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा | सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा || आदि सृष्टि मे विधि को श्रुति उपदेश दिया | जीव मात्रा का जाग मे, ज्ञान विकास किया || ऋषि अंगीरा ताप से, शांति नहीं पाई | रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रया लीना | संकट मोचन बनकर डोर दुःखा कीना || जय श्री विश्वकर्मा जब रथकार दंपति, तुम्हारी टर करी | सुनकर दीं प्रार्थना, विपत हरी सागरी || एकानन चतुरानन, पंचानन राजे | त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे || ध्यान धरे तब पद का, सकल सिद्धि आवे | मन द्विविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे || श्री विश्वकर्मा की आरती जो कोई गावे | भाजात गजानांद स्वामी, सुख

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    Parvati Mata Ki Aarti | माता पार्वती जी की आरती | Shri Parvati Maa

    माता पार्वती जी की आरती जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रम्हा सनातन देवी शुभ फल कदा दाता || जय पार्वती || अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता || जय पार्वती || सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था || जय पार्वती || सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता || जय पार्वती || शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता || जय पार्वती || सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराता नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता || जय पार्वती || देवन अरज करत हम चित को लाता गावत दे दे ताली मन में रंगराता || जय

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    Ganga Mata ki Aarti | आरती श्री गंगा जी की | Ganga Aarti

    आरती श्री गंगा जी की ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फ़ल पाता. ॐ जय गंगा माता चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता. ॐ जय गंगा माता पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुखदाता. ॐ जय गंगा माता एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता. ॐ जय गंगा माता आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता. ॐ जय गंगा माता Ganga Mata ki Aarti Om Jai Gange Mata, Shri Jai Gange Mata Jo Nar Tumko Dhyata, Man Vanchit Phal Pata Om Jai Gange Mata !!

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    Brihaspati Dev Aarti | बृहस्पति देव की आरती | Guruvaar Aarti

    बृहस्पति देव की आरती ॐ जय वृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा छिन छिन भोग लगाऊ फल मेवा तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी जगत्पिता जगदीश्वर तुम सबके स्वामी चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता तन मन धन अर्पणकर जो जन शरण पड़े प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े दीं दयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी पाप दोष सब हर्ता, भावः बंधन हार सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो विषय विकार मिटाओ संतान सुखकारी जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे जेस्तानंद बंद सो सो निश्चय पावे सब बोलो विष्णु भगवान की जय सब बोलो बृहस्पति भगवान की जये Brihaspati Dev Aarti Om Jai Bhraspati Deva, Jai Bhraspati Deva. Chin Chin Bhoog Lagaoon Phal Mewa Tum Puran

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    Maa Jagdamba Aarti | जगदम्बा माता जी की आरती | Jagdamba Mata Ki Aarti

    जगदम्बा माता जी की आरती आरती कीजे शैल सुता की जग्दाम्बजी की, स्नेह सुधा सुख सुन्दर लीजै, जिनके नाम लेट दृग भीजै, ऐसी वह माता वसुधा की आरती कीजे शैल सुता की जग्दाम्बजी की, || आरती कीजे || पाप विनाशिनी कलि मॉल हारिणी, दयामयी भवसागर तारिणी शस्त्र धारिणी शैल विहारिणी, बुधिराशी गणपति माता की आरती कीजे शैल सुता की जग्दाम्बजी की, || आरती कीजे || सिंहवाहिनी मातु भवानी, गौरव गान करें जग प्राणी शिव के हृदयासन की रानी, करें आरती मिल- जुल ताकि आरती कीजे शैल सुता की जग्दाम्बजी की, || आरती कीजे || Maa Jagdamba Aarti Aarti Kije Shail Suta Ki Jagdambaji, Sneh Sudha Sukh Sundar Lije, Jinke Naam Let Drig Bhije, Aisi Vah Maataa Vasudhaa Ki Aarti Kije

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    Sheetala Mata Aarti | शीतला माता की आरती | Shitla Mata Aarti

    शीतला माता की आरती जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता, आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता | जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता | रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता, ऋद्धिसिद्धि चंवर डोलावें, जगमग छवि छाता | जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता | विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता, वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता | जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता | इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा, सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता | जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता | घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता, करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता | जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता | ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता, भक्तन

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    Maa Chintpurni Aarti | श्री चिंतपूर्णी माता की आरती | Chintpurni Mata Ki Aarti

    श्री चिंतपूर्णी माता की आरती चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जग को तारो भोली माँ जन को तारो भोली माँ, काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा || भोली माँ || सिन्हा पर भाई असवार, भोली माँ, चिंतपूर्णी चिंता दूर || भोली माँ || एक हाथ खड़ग दूजे में खांडा, तीजे त्रिशूल सम्भालो, || भोली माँ || चौथे हाथ चक्कर गदा, पाँचवे-छठे मुण्ड़ो की माला, || भोली माँ || सातवे से रुण्ड मुण्ड बिदारे, आठवे से असुर संहारो, || भोली माँ || चम्पे का बाग़ लगा अति सुन्दर, बैठी दीवान लगाये, || भोली माँ || हरी ब्रम्हा तेरे भवन विराजे, लाल चंदोया बैठी तान, || भोली माँ || औखी घाटी विकटा पैंडा, तले बहे दरिया, || भोली माँ || सुमन चरण ध्यानु

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    Gayatri Mata Aarti | श्री गायत्री देवी की आरती | Aarti Gayatri Mata Ki

    श्री गायत्री देवी की आरती आरती श्री गायत्रीजी की ज्ञानद्वीप और श्रद्धा की बाती। सो भक्ति ही पूर्ति करै जहं घी को।। आरती… मानस की शुची थाल के ऊपर। देवी की ज्योत जगैं जह नीकी।। आरती… शुद्ध मनोरथ ते जहां घण्टा। बाजै करै आसुह ही की।। आरती… जाके समक्ष हमें तिहुं लोक के। गद्दी मिले सबहुं लगै फीकी।। आरती… आरती प्रेम सौ नेम सो करि। ध्यावहिं मूरति ब्रह्मा लली की।। आरती… संकट आवै न पास कबौ तिन्हें। सम्पदा और सुख की बनै लीकी।। आरती… Gayatri Mata Aarti Aarti shri Gayatri ji ki Gyan ko dip aur shraddha ki bati So bhakti hi purti karai jahan ghiki, aarti… Manas ki shuchi thal ke upar, Devi ki joti jagai jahniki, aarti… Shudhi

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    Gau Mata Aarti | गौमाता की आरती | जय गौ माता

    गौमाता की आरती आरती श्री गैया मैया की आरती हरनि विश्वधैया की || अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी, अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी || सुर मानव सौभाग्याविधायिनी, प्यारी पूज्य

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    Shri Vishwakarma Aarti | श्री विश्वकर्मा जी की आरती | विश्वकर्मा पूजा आरती

    श्री विश्वकर्मा जी की आरती जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा | सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा || आदि सृष्टि मे विधि

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    Brihaspati Dev Aarti | बृहस्पति देव की आरती | Guruvaar Aarti

    बृहस्पति देव की आरती ॐ जय वृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा छिन छिन भोग लगाऊ फल मेवा तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी जगत्पिता जगदीश्वर तुम

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