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Deva Ho Deva Ganpati Deva | देवा हो देवा गणपति देवा: | Ganpati Vandna

देवा हो देवा गणपति देवा: गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया मोरया रे, बाप्पा मोरया रे देवा हो देवा, गणपति देवा, तुमसे बढ़कर कौन स्वामी तुमसे बढ़कर कौन और तुम्हारे भक्तजनों में, हमसे बढ़कर कौन हमसे बढ़कर कौन देवा हो देवा, गणपति देवा, तुमसे बढ़कर कौन स्वामी तुमसे बढ़कर कौन अद्भुत रूप ये काया भारी, महिमा बड़ी है दर्शन की प्रभु महिमा बड़ी है दर्शन की बिन मांगे पूरी हो जाए, जो भी इच्छा हो मन की प्रभु जो भी इच्छा हो मन की गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया देवा हो देवा, गणपति देवा, तुमसे बढ़कर कौन स्वामी तुमसे बढ़कर कौन और तुम्हारे भक्तजनों में, हमसे बढ़कर कौन हमसे बढ़कर कौन छोटी सी आशा लाया हूँ छोटे से मन

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Chamunda Devi Aarti | माँ चामुण्डा देवी जी की आरती | Chamunda Mata Ki Aarti

माँ चामुण्डा देवी जी की आरती जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति । तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥ मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥ कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥ केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी । सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥ कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती । कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥ शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती । धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥ चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू। बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥ भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी। मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥ कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती । श्री मालकेतु

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Yogmaya devi Aarti | मां योगमाया की आरती | Maa Yogmaya

मां योगमाया की आरती ॐ जय माँ योगमाया ॐ जय श्री योगमाया । भक्त जनों को अपने… दे शीतल छाया ॥ ॐ जय श्री… तुम देवी कुलरक्षक ग्वालों की दाती । कल्याणी कष्टों को… क्षण में दूर करती ॥ ॐ जय श्री… तुम हो शक्ति धरा की महिमा हो नग की । पूर्ण हो करती इच्छा… तुम सबके मन की ॥ ॐ जय श्री… हम पर कृपा सदा हो मैय्या ये वर दो । दर्शन दो हे माता… हमें धन्य कर दो ॥ ॐ जय श्री … भक्त जनों को अपने… दे शीतल छाया ॥ ॐ जय श्री… ॥ इति मां योगमाया आरती संपूर्णम् ॥ Yogmaya Devi Aarti Om Jai Maa Yogmaya Om Jai Shree Yogmaya . Bhakt Jano Ko

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Maa Brahmacharini Aarti | मां ब्रह्माचारिणी की आरती | Brahmacharini mantra

मां ब्रह्माचारिणी की आरती जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता । जय चतुरानन प्रिय सुख दाता ॥ ब्रह्मा जी के मन भाती हो । ज्ञान सभी को सिखलाती हो ॥ ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा । जिसको जपे सकल संसारा ॥ जय गायत्री वेद की माता । जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता ॥ कमी कोई रहने न पाए । कोई भी दुख सहने न पाए ॥ उसकी विरति रहे ठिकाने । जो ​तेरी महिमा को जाने ॥ रुद्राक्ष की माला ले कर । जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर ॥ आलस छोड़ करे गुणगाना । मां तुम उसको सुख पहुंचाना ॥ ब्रह्माचारिणी तेरो नाम । पूर्ण करो सब मेरे काम ॥ भक्त तेरे चरणों का पुजारी । रखना लाज मेरी महतारी

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Guru Nanak ji ki Aarti | गुरुनानक जी की आरती | Gagan Mein Thaal Aarti

गुरुनानक जी की आरती गगन में थालु रवि चंदु दीपक। बने तारिका मण्डल जनक मोती।। धूपमल आनलो पवणु चवरो करे। सगल बनराई फूलंत जोति ।। कैसी आरती होई भवखंडना तेरी आरती। अनहता सबद बाजंत भेरी रहाउ।। सहस तव नैन नन नैन है ‍तोहि कउ। सहस मू‍रती मना एक तोही।। सहस पद विमल रंग एक पद गंध बिनु। सहस तव गंध इव चलत मोहि ।। सभमहि जोति-जो‍ति है सोई, तिसकै चानणि सभ महि चानणु होई। गुरसाखी जोति परगुट होई। जो तिसु भावै सु आरती होई ।। हर‍ि चरण कमल मकरंद लोभित मनो, अ‍नदिनी मोहि आहि पिआसा। कृपा जलु देहि नानक सारिंग, कउ होई जाते तेरे नामि वासा।। Guru Nanak Ji Ki Aarti Gagan Mae Thal Ravachanda Deepak Banay Tarka Mandala Janak

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Kali Mata Aarti | श्री काली मां की आरती | Kali Mata Ki Aarti

श्री काली मां की आरती मंगल की सेवा, सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े । पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे। सुन जगदम्बे कर न विलम्बे, सन्तन के भण्डार भरे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाली, जै काली कल्याण करे॥ बुद्धि विधाता तू जगमाता, मेरा कारज सिद्ध करे। चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन परे। जब-जब भीर पड़े भक्तन पर, तब-तब आय सहाय करे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाली, जै काली कल्याण करे॥ बार-बार तैं सब जग मोह्‌यो, तरुणी रूप अनूप धरे। माता होकर पुत्र खिलावै, कहीं भार्य बन भोग करे। संतन सुखदाई सदा सहाई, सन्त खड़े जयकार करे। संतन प्रतिपाली सदाखुशहाली, जै काली कल्याण करे॥ ब्रह्‌मा, विष्णु, महेश फल लिए, भेंट देन तब द्वार खड़े। अटल सिंहासन

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Shri Satyanarayan Aarti | श्री सत्यनारायण जी आरती | Satyanarayan Bhagwan Ki Aarti

श्री सत्यनारायण जी आरती जय लक्ष्मी रमना जय जय श्री लक्ष्मी रमना सत्यानारयाना स्वामी जन पटक हरना रत्ना जडित सिंघासन अद्भुत छबि राजे नारद करत निरंजन घंटा ध्वनि बाजे प्रकट भये कलि कारन द्विज को दरस दियो बुधो ब्रह्मिन बनकर कंचन महल कियो दुर्बल भील कराल जिनपर किरपा करी चंद्रचूड एक राजा तिनकी विपति हरी भाव भक्ति के कारन छिन छिन रूप धरयो श्रद्धा धारण किन्ही तिनके काज सरयो ग्वाल बाल संग राजा बन में भक्ति करी मन वांछित फल दीन्हा दीनदयाल हरी चढात प्रसाद सवायो कदली फल मेवा धुप दीप तुलसी से राजी सतदेवा श्री सत्यानारयाना जी की आरती जो कोई नर गावे कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे Shri Satyanarayan Aarti Jai Laxmi ramna jai jai shree laxmi

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Shri Vishnu Aarti | श्री विष्णु आरती | Om Jai Jagadish Hare Aarti

श्री विष्णु आरती ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे | भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे | ॐ जय जगदीश हरे || जो ध्यावे फल पावे, दुःखबिन से मन का, स्वामी दुःखबिन से मन का | सुख सम्पति घर आवे, सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का | ॐ जय जगदीश हरे || मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं मैं किसकी | तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी | ॐ जय जगदीश हरे || तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी | पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी | ॐ जय जगदीश हरे || तुम करुणा

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Lord Vitthal Aarti | श्री विठोबाची आरती | Yuge Atthavis |

श्री विठोबाची आरती युगें अठ्ठावीस विटेवरी उभा। वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा। पुण्डलिकाचे भेटी परब्रह्म आलें गा। चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा॥ जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा। रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥ तुळसीमाळा गळां कर ठेवुनि कटीं। कांसे पीताम्बर कस्तुरि लल्लाटी। देव सुरवर नित्य येती भेटी। गरुड हनुमन्त पुढे उभे राहती॥ जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा। रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥ धन्य वेणुनाद अनुक्षेत्रपाळा। सुवर्णाची कमळे वनमाळा गळां। राही रखुमाबाई राणीया सकळा। ओवाळिती राजा विठोबा सांवळा॥ जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा। रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥ ओवाळूं आरत्या कुर्वण्ड्या येती। चन्द्रभागेमाजी सोडुनियां देती। दिंड्या पताका वैष्णव नाचती। पंढरीचा महिमा वर्णावा किती॥ जय देव जय देव जय पाण्डुरंगा। रखुमाईवल्लभा राईच्या वल्लभा पावें जिवलगा॥ आषाढी कार्तिकी भक्तजन येती। चन्द्रभागेमाजी

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Shri Venkatesh Aarti | श्री व्यंकटेश आरती | Lord Venkatesh

श्री व्यंकटेश आरती शेषाचल अवतार तारक तूं देवा l सुरवर मुनिवर भावें करिती जन सेवा ll कमलारमणा अससी अगणित गुण ठेवा l कमलाक्षा मज रक्षुनि सत्वर वर द्यावा ll १ ll जय देव जय देव जय व्यंकटेशा l केवळ करूणासिंधु पुरविसी आशा ll धृ. ll हे निजवैकुंठ म्हणुनी ध्यातों मी तू तें l दाखविसी गुण कैसे सकळिक लोकाते ll देखुनि तुझे स्वरूप सुख अद्‌भुत होते l ध्यातां तुजला श्रीपति दृढ मानस होते ll Shri Venkatesh Aarti Sheshachal avtar tarak tu deva | Survar munivar bhave kariti jan seva || Kamlaramna assi aganit gun theva | Kamlaksha maj rakshuni stavar var dhyava || 1 || Jay dev jay dev jay venkatesha | Keval karunasindhu purvisi asha || Dhru.|| Hey nijvaikunth mahuni

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Maa Baglamukhi Kavach
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Deva Ho Deva Ganpati Deva | देवा हो देवा गणपति देवा: | Ganpati Vandna

देवा हो देवा गणपति देवा: गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया मोरया रे, बाप्पा मोरया रे देवा हो देवा, गणपति देवा, तुमसे बढ़कर कौन स्वामी

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Chamunda Devi Aarti | माँ चामुण्डा देवी जी की आरती | Chamunda Mata Ki Aarti

माँ चामुण्डा देवी जी की आरती जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति । तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥ मांग सिंदूर बिराजत

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Shri Satyanarayan Aarti | श्री सत्यनारायण जी आरती | Satyanarayan Bhagwan Ki Aarti

श्री सत्यनारायण जी आरती जय लक्ष्मी रमना जय जय श्री लक्ष्मी रमना सत्यानारयाना स्वामी जन पटक हरना रत्ना जडित सिंघासन अद्भुत छबि राजे नारद करत

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Lord Vitthal Aarti | श्री विठोबाची आरती | Yuge Atthavis |

श्री विठोबाची आरती युगें अठ्ठावीस विटेवरी उभा। वामांगी रखुमाई दिसे दिव्य शोभा। पुण्डलिकाचे भेटी परब्रह्म आलें गा। चरणी वाहे भीमा उद्धरी जगा॥ जय देव जय

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