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Black Obsidian Pencil – Remedywala
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Mahalakshmi Aarti | महालक्ष्मी आरती

🌺 श्री महालक्ष्मी आरती 🌺 माँ लक्ष्मी की कृपा पाने की पावन आरती 🙏 श्री महालक्ष्मी आरती (हिंदी) 🙏 जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।वससी व्यापकरूपे तू स्थूलसूक्ष्मी॥ करवीरपुरवासिनी सुरवरमुनिमाता।पुरहरवरदायिनी मुरहरप्रियकान्ता।कमलाकारें जठरी जन्मविला धाता।सहस्त्रवदनी भूधर न पुरे गुण गातां॥ जय देवी जय देवी… मातुलिंग गदा खेटक रवikिरणीं।झळके हाटकवाटी पीयुषरसपाणी।माणिकरसना सुरंगवसना मृगनयनी।शशिकरवदना राजस मदनाची जननी॥ जय देवी जय देवी… तारा शक्ति अगम्या शिवभजकां गौरी।सांख्य म्हणती प्रकृती निर्गुण निर्धारी।गायत्री निजबीजा निगमागम सारी।प्रगटे पद्मावती निजधर्माचारी॥ जय देवी जय देवी… अमृतभरिते सरिते अघदुरितें वारीं।मारी दुर्घट असुरां भवदुस्तर तारीं।वारी मायापटल प्रणमत परिवारी।हें रुप चिद्रूप दावी निर्धारी॥ जय देवी जय देवी… चतुराननें कुश्चित कर्मांच्या ओळी।लिहिल्या असतिल माते माझे निजभाळी।पुसोनि चरणातळी पदसुमने क्षाळी।मुक्तेश्वर नागर क्षीरसागरबाळी॥ जय देवी जय देवी…   🌸 Shri Mahalakshmi Aarti (English / Hinglish)

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Vaibhav Lakshmi Vrat Aarti | वैभव लक्ष्मी व्रत आरती

🌼 वैभव लक्ष्मी व्रत आरती 🌼 ॐ वैभव लक्ष्मी माता की पावन आरती 🙏 वैभव लक्ष्मी माता आरती (हिंदी) 🙏 ॐ वैभव लक्ष्मी माता, मैया वैभव लक्ष्मी माता,भक्तों के हितकारिनी, भक्तों के हितकारिनी,सुख वैभव दाता, ॐ वैभव लक्ष्मी माता। लक्ष्मी माँ का नाम जो लेता, सुख सम्पति पाता,मैया सुख सम्पति पाता, दुःख दरिद्र मिटता,दुःख दरिद्र मिटता, बांछित फल पाता। ॐ वैभव लक्ष्मी माता, मैया वैभव लक्ष्मी माता,भक्तों के हितकारिनी, भक्तों के हितकारिनी,सुख वैभव दाता, ॐ वैभव लक्ष्मी माता। लक्ष्मी माता तू जग माता, जग पालक रानी,मैया जग पालक रानी, हाथ जोड़ गुण गाते,हाथ जोड़ गुण गाते, जग के सब प्राणी। ॐ वैभव लक्ष्मी माता, मैया वैभव लक्ष्मी माता,भक्तों के हितकारिनी, भक्तों के हितकारिनी,सुख वैभव दाता, ॐ वैभव लक्ष्मी माता। हे

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Mahalakshmi Ashtakam | महालक्ष्मी अष्टकम

हिंदू धर्म में देवी महालक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जिस घर में उनका वास होता है, वहाँ सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा हमेशा बनी रहती है। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के अनेक उपाय बताए गए हैं, लेकिन उनमें से सबसे प्रभावकारी माना जाता है — महालक्ष्मी अष्टकम। नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥1॥ नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि। सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥2॥ सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि। सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥3॥ सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि। मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥4॥ आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि। योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥5॥ स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे। महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥6॥ पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि। परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥7॥ श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते। जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥8॥ महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः। सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥9॥ एककाले पठेन्नित्यं

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Shri Hanuman Aarti

Shri Hanuman Aarti ||श्री हनुमान आरती|| आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरवर कांपे, रोग-दोष जाके निकट न झांके। अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई। दे बीरा रघुनाथ पठाए, लंका जारि सिया सुधि लाए। लंका सो कोट समुद्र-सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई। लंका जारि असुर संहारे, सियारामजी के काज संवारे। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे, लाइ संजीवन प्राण उबारे। पैठि पाताल तोरि जमकारे, अहिरावण की भुजा उखारे। बाएं भुजा असुर दल मारे, दाहिने भुजा संत जन तारे। सुर-नर-मुनि आरती उतारें, जय जय जय हनुमान उचारें। कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई। जो हनुमान जी की आरती गावे, बसहि बैकुंठ परम पद पावे। सं. हनुमान आरती का

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Shri Yamuna Ji Ki Aarti | जय जय श्री यमुना | यमुनाजी की आरती

यमुनाजी की आरती ॐ जय यमुना माता, हरि जय यमुना माता जो नहावे फल पावे सुख दुःख की दाता ॐ जय यमुना माता पावन श्रीयमुना जल अगम बहै धारा, जो जन शरण में आया कर दिया निस्तारा ॐ जय यमुना माता जो जन प्रातः ही उठकर नित्य स्नान करे, यम के त्रास न पावे जो नित्य ध्यान करे ॐ जय यमुना माता कलिकाल में महिमा तुम्हारी अटल रही, तुम्हारा बड़ा महातम चारो वेद कही ॐ जय यमुना माता आन तुम्हारे माता प्रभु अवतार लियो, नित्य निर्मल जल पीकर कंस को मार दियो ॐ जय यमुना माता नमो मात भय हरणी शुभ मंगल करणी मन बेचैन भया हैं तुम बिन वैतरणी ॐ जय यमुना माता Shri Yamuna Ji Ki Aarti Om

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Kaal bhairav ki aarti | भैरव जी की आरती | Jai Bhairav Deva

भैरव जी की आरती जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा जय काली और गौर देवी कृत सेवा || जय भैरव || तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक भक्तो के सुख कारक भीषण वपु धारक || जय भैरव || वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी || जय भैरव || तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे चौमुख दीपक दर्शन दुःख खोवे || जय भैरव || तेल चटकी दधि मिश्रित भाषावाली तेरी कृपा कीजिये भैरव, करिए नहीं देरी || जय भैरव || पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू दम्कावत बटुकनाथ बन बालक जल मन हरषावत || जय भैरव || बत्कुनाथ जी की आरती जो कोई नर गावे कहे धरनी धर नर मनवांछित फल पावे || जय

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Maa Vaishno Devi Aarti | वैष्णो देवी आरती | Aarti Mata Vaishno Ji

वैष्णो देवी आरती जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता || जय वैष्णवी || शीश पर छत्र बिराजे, मुर्तिया प्यारी गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी || जय वैष्णवी || ब्रम्हावेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे सेवत चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे || जय वैष्णवी || सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे बार बार देखने को, ए माँ मन चावे || जय वैष्णवी || भवन पे झंडे झूले, घंटा ध्वनि बाजे ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे || जय वैष्णवी || पाँव सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पिष्प मेवा दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा || जय वैष्णवी || जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे इतनी स्तुति निशदिन, जो नर

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Shri Shani Dev Ki Aarti | श्री शनि देव जी आरती | lyrics of Shani Dev Ki Aarti

श्री शनि देव जी आरती !! जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी, सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी !! !! श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी, नालाम्बर धार नाथ गज की अवसारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी !! !! क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी, मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी !! !! मोदक मिष्ठान पान चढ़त है सुपारी, लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी !! !! दे दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी, विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी, जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी !! ॐ शं शनिश्चराय नमः Shri Shani Dev Aarti !! Jai Jai Shri Shanidev

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Chandra Dev Ji ki Aarti | चन्द्र देव की आरती | Aarti Chandra Dev ki

चन्द्र देव की आरती ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा । दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी । रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी । दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी । जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे । सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि । योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें । ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा । वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी । प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी । शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी । धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे । विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी । सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें । ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा । दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी

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Gau Mata Aarti | गौमाता की आरती | जय गौ माता

गौमाता की आरती आरती श्री गैया मैया की आरती हरनि विश्वधैया की || अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी, अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी || सुर मानव सौभाग्याविधायिनी, प्यारी पूज्य नन्द छैया की || अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता, मधुर अमिय दुग्धान्न प्रब्दाता || रोग शोक संकट परित्राता, भवसागर हित दृढ़ नैया की || आयु ओज आरोग्यविकाशिनी, दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी || सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी, विमल विवेक बुद्धि दैया की || सेवक हो चाहे दुखदाई, सा पय सुधा पियावति माई || शत्रु-मित्र सबको सुखदायी, स्नेह स्वभाव विश्व जैया की || Gau Mata Aarti Aarti Shri Gaiya Maiya Ki, Aarti Harni Viswadhaiya Ki Arthkaam Saddharm Pradaayini, Avichal Amal Muktipadyaini Sur Maanav Saubhagyavidhayini, Pyaari Pujya Nand Chaiya Ki Akhil Vishwa Pratipaalini Maata, Madhur Amiy Dugdhanan Prabdaata Rog

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Mahalakshmi Aarti | महालक्ष्मी आरती

🌺 श्री महालक्ष्मी आरती 🌺 माँ लक्ष्मी की कृपा पाने की पावन आरती 🙏 श्री महालक्ष्मी आरती (हिंदी) 🙏 जय देवी जय देवी जय महालक्ष्मी।वससी

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Mahalakshmi Ashtakam | महालक्ष्मी अष्टकम

हिंदू धर्म में देवी महालक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जिस घर में उनका वास होता है, वहाँ

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Shri Hanuman Aarti

Shri Hanuman Aarti ||श्री हनुमान आरती|| आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरवर कांपे, रोग-दोष जाके निकट न

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Gau Mata Aarti | गौमाता की आरती | जय गौ माता

गौमाता की आरती आरती श्री गैया मैया की आरती हरनि विश्वधैया की || अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी, अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी || सुर मानव सौभाग्याविधायिनी, प्यारी पूज्य

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