हनुमान त्रिशती नामावली
Hanuman Trishati Namavali Ka Arth | हनुमान त्रिशती नामावली का अर्थ :
Tri = 3, Shati = 100
Trishati = 300
Namavali = Naam ki mala
Hanuman Trishati Namavali matlab — “Hanuman Ji ke 300 alag-alag divya naam”
हनुमान त्रिशति नामावली: |
हनुमान त्रिशति – नाम 1 से 50
| क्रम | नाम | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | ॐ हनुमते नमः | जिस हनुमान से सभी सिद्धियाँ मिलती हैं |
| 2 | ॐ मारुतात्मजाय नमः | पवनपुत्र हनुमान को नमन |
| 3 | ॐ अंजनिसुताय नमः | माता अंजनी के पुत्र |
| 4 | ॐ रुद्रावताराय नमः | भगवान रुद्र का अवतार |
| 5 | ॐ वज्रदेहाय नमः | वज्र जैसी देह वाले |
| 6 | ॐ महाबलाय नमः | असीम बल वाले |
| 7 | ॐ महावीराय नमः | परम पराक्रमी |
| 8 | ॐ रामदूताय नमः | श्रीराम के दूत |
| 9 | ॐ रामभक्ताय नमः | भगवान राम के परम भक्त |
| 10 | ॐ सीताशोकविनाशकाय नमः | माता सीता का शोक हरने वाले |
| 11 | ॐ लक्ष्मणप्राणदातृ नमः | लक्ष्मण को जीवन देने वाले |
| 12 | ॐ संकटमोचनाय नमः | संकट दूर करने वाले |
| 13 | ॐ दूतात्मने नमः | दिव्य दूत |
| 14 | ॐ प्रभंजनसुताय नमः | वायु के तेजस्वी पुत्र |
| 15 | ॐ बालविनाशकाय नमः | बुराइयों का नाश करने वाले |
| 16 | ॐ राक्षसविदारकाय नमः | राक्षसों को नष्ट करने वाले |
| 17 | ॐ लंकादाहकाय नमः | लंका दहन करने वाले |
| 18 | ॐ समुद्रलङ्घकाय नमः | समुद्र पार करने वाले |
| 19 | ॐ पर्वताहारिणे नमः | पर्वत उठाने वाले |
| 20 | ॐ शत्रुसूदनाय नमः | शत्रुओं का संहार करने वाले |
| 21 | ॐ ज्वलन्ततेजसे नमः | अग्नि समान तेज वाले |
| 22 | ॐ महाबुद्धये नमः | महान बुद्धि वाले |
| 23 | ॐ सर्वज्ञाय नमः | सर्वज्ञ—सब जानने वाले |
| 24 | ॐ चतुराय नमः | अत्यंत चतुर |
| 25 | ॐ भीमपराक्रमाय नमः | भयंकर पराक्रम वाले |
| 26 | ॐ भयहराय नमः | भय दूर करने वाले |
| 27 | ॐ श्रुतिमन्ते नमः | वेदों के ज्ञाता |
| 28 | ॐ वनरेश्वराय नमः | वानरों के ईश्वर |
| 29 | ॐ सुग्रीवसखा नमः | सुग्रीव के मित्र |
| 30 | ॐ भक्तवत्सलाय नमः | भक्तों से प्रेम करने वाले |
| 31 | ॐ आरोग्यदाय नमः | स्वास्थ्य देने वाले |
| 32 | ॐ संयमिनें नमः | इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाले |
| 33 | ॐ ब्रह्मचारिणे नमः | अखंड ब्रह्मचारी |
| 34 | ॐ ज्ञानगम्याय नमः | ज्ञान से प्राप्त होने वाले |
| 35 | ॐ योगिनांपतये नमः | योगियों के स्वामी |
| 36 | ॐ भक्तप्रतिपालकाय नमः | भक्तों की रक्षा करने वाले |
| 37 | ॐ शौर्यप्रदाय नमः | साहस देने वाले |
| 38 | ॐ शक्ति प्रदाय नमः | शक्ति देने वाले |
| 39 | ॐ कामरूपिणे नमः | इच्छा अनुसार रूप धारण करने वाले |
| 40 | ॐ अमोघाय नमः | जिसका प्रभाव अचूक है |
| 41 | ॐ तेजोमूर्तये नमः | तेज की मूर्ति |
| 42 | ॐ सत्यवाक्याय नमः | सदा सत्य बोलने वाले |
| 43 | ॐ दीर्घदर्शिने नमः | दूरदर्शी |
| 44 | ॐ अनिर्वाणाय नमः | जिसका तेज कभी कम न हो |
| 45 | ॐ त्रैलोक्यविजयाय नमः | तीनों लोकों में विजयी |
| 46 | ॐ सिद्धिदाय नमः | सिद्धियाँ देने वाले |
| 47 | ॐ सर्वरोगनिवारकाय नमः | सभी रोगों का नाश |
| 48 | ॐ भूतप्रेतनाशकाय नमः | भूत-प्रेत से रक्षा |
| 49 | ॐ ग्रहदोषहराय नमः | ग्रह पीड़ा दूर करने वाले |
| 50 | ॐ धनप्रदाय नमः | धन-संपत्ति देने वाले |
हनुमान त्रिशति – नाम 51 से 100
| क्रम | नाम | अर्थ |
|---|---|---|
| 51 | ॐ सौम्यरूपाय नमः | शांत और सौम्य स्वरूप वाले |
| 52 | ॐ महाघोराय नमः | शत्रुओं के लिए भयानक |
| 53 | ॐ कपीश्वराय नमः | वानरों के ईश्वर |
| 54 | ॐ रामसखाय नमः | श्रीराम के सखा |
| 55 | ॐ अमृतवर्चसे नमः | अमृत समान तेज वाले |
| 56 | ॐ जटाधराय नमः | जटाओं से सुशोभित |
| 57 | ॐ महाकायाय नमः | विशाल शरीर वाले |
| 58 | ॐ सर्वसंरक्षकाय नमः | सभी की रक्षा करने वाले |
| 59 | ॐ स्थिरबुद्धये नमः | अचल बुद्धि वाले |
| 60 | ॐ हरिप्रियाय नमः | श्रीहरि को प्रिय |
| 61 | ॐ तपस्विने नमः | महान तप करने वाले |
| 62 | ॐ वेदविदे नमः | वेदों के ज्ञाता |
| 63 | ॐ संतानदाय नमः | संतान इच्छित देने वाले |
| 64 | ॐ शंकरानुग्रहकृते नमः | शिव की कृपा पाने वाले |
| 65 | ॐ कालान्तकाय नमः | मृत्यु को भी जीतने वाले |
| 66 | ॐ कामदुघाय नमः | मनोकामना पूर्ण करने वाले |
| 67 | ॐ भैरवरूपाय नमः | भैरव स्वरूप वाले |
| 68 | ॐ दैत्यद्वंसकाय नमः | दैत्यों का नाश करने वाले |
| 69 | ॐ गुणनिधये नमः | सभी गुणों का खजाना |
| 70 | ॐ करुणामयाय नमः | दयालु और कृपालु |
| 71 | ॐ विद्वत्प्रियाय नमः | विद्वानों को प्रिय |
| 72 | ॐ कपींद्राय नमः | कपियों के राजा |
| 73 | ॐ मतिमन्ताय नमः | अत्यंत बुद्धिमान |
| 74 | ॐ वाग्मीने नमः | प्रभावशाली वक्ता |
| 75 | ॐ वज्रहस्ताय नमः | वज्र समान बल वाले |
| 76 | ॐ महाधैर्याय नमः | महान धैर्य वाले |
| 77 | ॐ गुर्वर्चसे नमः | गुरु समान तेज वाले |
| 78 | ॐ महाशौर्याय नमः | महान शौर्य वाले |
| 79 | ॐ त्रिलोकपतये नमः | तीनों लोकों के स्वामी |
| 80 | ॐ प्रणतार्तिहर्त्रे नमः | भक्तों का दुख दूर करने वाले |
| 81 | ॐ वज्रदेहाय नमः | वज्र जैसी देह वाले |
| 82 | ॐ अदृश्याय नमः | अदृश्य रूप धारण करने वाले |
| 83 | ॐ अमोघकर्याय नमः | जिसका कार्य कभी विफल न हो |
| 84 | ॐ निर्भयदाय नमः | निर्भय बनाने वाले |
| 85 | ॐ दुःखनाशकाय नमः | दुःख हटाने वाले |
| 86 | ॐ रोगहन्त्रे नमः | रोगों का नाश करने वाले |
| 87 | ॐ अग्निगर्भाय नमः | अग्नि समान तेज में स्थित |
| 88 | ॐ सूर्यप्रतिमाय नमः | सूर्य समान तेज वाले |
| 89 | ॐ पिंगाक्षाय नमः | पीले नेत्रों वाले |
| 90 | ॐ भरतप्रियाय नमः | भाई भरत को प्रिय |
| 91 | ॐ महायोगिने नमः | महान योगी |
| 92 | ॐ यज्ञप्रियाय नमः | यज्ञ में प्रिय |
| 93 | ॐ तपोधनाय नमः | तप की संपत्ति वाले |
| 94 | ॐ रौद्ररूपाय नमः | रौद्र स्वरूप धारण करने वाले |
| 95 | ॐ भक्तहृदयवासिने नमः | भक्तों के हृदय में वास करने वाले |
| 96 | ॐ परात्मने नमः | परमात्मा रूप |
| 97 | ॐ महाकर्मणे नमः | महान कर्म करने वाले |
| 98 | ॐ देवतातीताय नमः | देवताओं से भी श्रेष्ठ |
| 99 | ॐ यन्त्रप्रभञ्जनाय नमः | सभी बंधनों को तोड़ने वाले |
| 100 | ॐ सर्वविघ्ननाशकाय नमः | सभी विघ्न हटाने वाले |
हनुमान त्रिशति – नाम 101 से 150
| क्रम | नाम | अर्थ |
|---|---|---|
| 101 | ॐ तेजस्विने नमः | प्रचंड तेज वाले |
| 102 | ॐ सिद्धरूपाय नमः | सिद्ध स्वरूप |
| 103 | ॐ महाहंसाय नमः | परम पवित्र |
| 104 | ॐ दुष्टनाशकाय नमः | दुष्टों का संहार |
| 105 | ॐ रक्षिताय नमः | संसार की रक्षा करने वाले |
| 106 | ॐ ऋषिसेविताय नमः | ऋषियों द्वारा पूजित |
| 107 | ॐ शत्रुभंजनाय नमः | शत्रुओं को तोड़ने वाले |
| 108 | ॐ शरणागतवत्सलाय नमः | शरण में आए को बचाने वाले |
| 109 | ॐ दीनबंधवे नमः | दुखियों के मित्र |
| 110 | ॐ अंजनीदुलाराय नमः | माता अंजनी के प्यारे |
| 111 | ॐ विद्याधराय नमः | ज्ञान धारण करने वाले |
| 112 | ॐ ज्वलद्दीप्तये नमः | अग्नि समान दीप्ति |
| 113 | ॐ दुष्टहन्त्री नमः | दुष्टों का विनाशक |
| 114 | ॐ महोत्कटाय नमः | अत्यंत शक्तिशाली |
| 115 | ॐ ब्रह्मरूपाय नमः | ब्रह्म स्वरूप |
| 116 | ॐ विश्वकर्याय नमः | विश्व में कार्य करने वाले |
| 117 | ॐ महाबलाय नमः | अत्यंत बलवान |
| 118 | ॐ सुरार्चिताय नमः | देवताओं द्वारा पूजित |
| 119 | ॐ जगदाधाराय नमः | जगत के आधार |
| 120 | ॐ सर्वपालकाय नमः | सबकी रक्षा करने वाले |
| 121 | ॐ उग्रतेजसे नमः | उग्र तेज वाले |
| 122 | ॐ उग्रायुधाय नमः | उग्र आयुध धारी |
| 123 | ॐ विष्णुभक्ताय नमः | विष्णु भक्त |
| 124 | ॐ भवतारणाय नमः | संसार से तारने वाले |
| 125 | ॐ सुरेन्द्रपूजिताय नमः | देवेंद्र द्वारा पूजित |
| 126 | ॐ प्रणवात्मने नमः | ओंकार स्वरूप |
| 127 | ॐ सर्वलोकप्रियाय नमः | सभी को प्रिय |
| 128 | ॐ दिव्यायुधधराय नमः | दिव्य आयुध धारण करने वाले |
| 129 | ॐ भक्तापराधिनाय नमः | भक्तों के वश में रहने वाले |
| 130 | ॐ श्रीरामप्रियाय नमः | श्रीराम को प्रिय |
| 131 | ॐ नित्यमंगलाय नमः | सदा मंगलकारक |
| 132 | ॐ शरण्याय नमः | शरण देने वाले |
| 133 | ॐ शक्रादिवन्दिताय नमः | इंद्र द्वारा वंदित |
| 134 | ॐ योगेश्वराय नमः | योगियों के स्वामी |
| 135 | ॐ महावीर्याय नमः | महान वीर्य वाले |
| 136 | ॐ परमहंसाय नमः | परमहंस स्वरूप |
| 137 | ॐ नित्यशुद्धाय नमः | सदैव शुद्ध |
| 138 | ॐ विशालाक्षाय नमः | विशाल नेत्रों वाले |
| 139 | ॐ कीर्तिवर्धनाय नमः | कीर्ति बढ़ाने वाले |
| 140 | ॐ सौख्यदाय नमः | सुख प्रदान करने वाले |
| 141 | ॐ सद्गतिदाय नमः | शुभ गति प्रदान करने वाले |
| 142 | ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः | सभी सिद्धियाँ देने वाले |
| 143 | ॐ तेजोवंताय नमः | अत्यंत तेज वाले |
| 144 | ॐ त्रैलोक्यप्रियाय नमः | तीनों लोकों के प्रिय |
| 145 | ॐ दीर्घायुकराय नमः | दीर्घायु देने वाले |
| 146 | ॐ भक्तानांपालकाय नमः | भक्तों की रक्षा करने वाले |
| 147 | ॐ सर्वक्लेशनाशकाय नमः | सभी क्लेश दूर करने वाले |
| 148 | ॐ विनयप्रदाय नमः | विनय सिखाने वाले |
| 149 | ॐ शुभकराय नमः | शुभ फल देने वाले |
| 150 | ॐ वरदाय नमः | वरदान देने वाले |
हनुमान त्रिशति – नाम 151 से 200
| क्रमांक | नाम | अर्थ |
|---|---|---|
| 151 | भक्तप्रियन | भक्तों को प्रिय रखने वाले |
| 152 | सिद्धिस्मरताम्-वरदः | स्मरण करने वालों को सिद्धि देने वाले |
| 153 | अमितप्रभावः | असीम प्रभाव वाले |
| 154 | सुग्रीवप्रियकरः | सुग्रीव के हित में कार्य करने वाले |
| 155 | राघवानुचरः | श्रीराम के अनुगामी |
| 156 | विरूपाक्षप्रियः | रुद्र के प्रिय |
| 157 | धनुर्वेदज्ञः | धनुर्वेद के ज्ञाता |
| 158 | व्याकरणपटुः | व्याकरण के माहिर |
| 159 | सर्वार्थसाधकः | सभी कार्य सिद्ध करने वाले |
| 160 | भक्तावश्यकरः | भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने वाले |
| 161 | समर्थरूपः | सर्वशक्तिमान स्वरूप |
| 162 | सर्वभूतदमनः | सभी दुष्ट शक्तियों को दबाने वाले |
| 163 | वज्रसारतनुः | वज्र समान कठोर शरीर वाले |
| 164 | महाप्रतापी | महान पराक्रम वाले |
| 165 | दुर्गदुर्गार्तिनाशनः | कठिन कष्टों को नष्ट करने वाले |
| 166 | शत्रुसैन्यविनाशकः | शत्रुओं के समूह का नाश करने वाले |
| 167 | रामनामरतः | रामनाम में रमने वाले |
| 168 | दीनानुकम्पकः | दीनों पर दया करने वाले |
| 169 | सामवेगकरः | ऊर्जा व उत्साह देने वाले |
| 170 | पिङ्गाक्षप्रियः | पिंगल नेत्र वाले देव प्रिय |
| 171 | जितेन्द्रियः | इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखने वाले |
| 172 | सिद्धचारणसेवितः | सिद्धों और चारणों द्वारा पूजित |
| 173 | राक्षसान्तकः | राक्षसों का अंत करने वाले |
| 174 | कालभैरवस्वरूपः | भयंकर रुद्र स्वरूप |
| 175 | सर्वविद्याविशारदः | सभी विद्याओं में निपुण |
| 176 | प्रसन्नात्मा | सदा शांत व प्रसन्नचित्त |
| 177 | शौर्यप्रदायकः | साहस प्रदान करने वाले |
| 178 | संसारभयरक्षकः | संसारिक भय से रक्षा करने वाले |
| 179 | कपीश्वरः | वानरों के स्वामी |
| 180 | परमात्मभक्तः | परमात्मा के परम भक्त |
| 181 | जगत्पूज्यः | संपूर्ण जगत द्वारा पूज्य |
| 182 | सर्वज्वरहरः | सभी प्रकार के ज्वर का नाश करने वाले |
| 183 | सर्वकर्मफलप्रदः | कर्मों का फल देने वाले |
| 184 | सिद्धिकारकः | सिद्धि प्रदान करने वाले |
| 185 | सुग्रीवमित्रः | सुग्रीव के सच्चे मित्र |
| 186 | शरणागतवत्सलः | शरण में आने वालों पर कृपालु |
| 187 | त्रैलोक्यवीरः | तीनों लोकों का वीर |
| 188 | अपराजितः | जिसे कोई पराजित न कर सके |
| 189 | सर्वपीडानिवारकः | सभी पीड़ाओं को दूर करने वाले |
| 190 | महातपस्वी | महान तपस्या करने वाले |
| 191 | कृपालुभावनः | करुणा का सागर |
| 192 | ऋषिसंशंसितः | ऋषियों द्वारा प्रशंसित |
| 193 | युद्धविशारदः | युद्धकला में पारंगत |
| 194 | वज्रदेहः | वज्र तुल्य कठोर शरीर |
| 195 | कालयवनविनाशकः | कालयवन का वध करने वाले |
| 196 | सर्वसुखप्रदः | सभी प्रकार के सुख देने वाले |
| 197 | संघातहरः | विपत्तियों को खत्म करने वाले |
| 198 | रावणान्तकः | रावण का अंत करने वाले |
| 199 | भीमपराक्रमः | भीषण पराक्रम वाले |
| 200 | सर्वविघ्नविनाशकः | सभी विघ्नों का नाश करने वाले |
हनुमान त्रिशति – नाम 201 से 250
| क्रमांक | हनुमान जी के 300 नाम | अर्थ / Meaning |
|---|---|---|
| 201 | शोकरहित | जो सभी प्रकार के शोक को दूर करते हैं |
| 202 | शूरवीर्य | अत्यंत शूर और पराक्रमी |
| 203 | भक्तवत्सल | भक्तों पर कृपा करने वाले |
| 204 | प्रणतार्तिहारी | शरणागत का दुःख हरने वाले |
| 205 | कामरूप | इच्छानुसार रूप धारण करने में समर्थ |
| 206 | सुरार्चित | देवताओं द्वारा पूजित |
| 207 | ज्ञानिनांवर्य | महान ज्ञानी जनों में श्रेष्ठ |
| 208 | जितेन्द्रिय | जिनके इन्द्रिय विजय में हैं |
| 209 | तपस्वी | महान तप का पालन करने वाले |
| 210 | प्राज्ञ | विवेक और प्रज्ञा से पूर्ण |
| 211 | महाक्रोध | धर्म के लिए प्रचंड रूप धारण करने वाले |
| 212 | महातेजा | तेज से प्रकाशित |
| 213 | महाबल | अपार शक्तियों से युक्त |
| 214 | वज्रदेह | वज्र के समान कठोर शरीर वाले |
| 215 | महाबाहु | अत्यंत बलशाली भुजाओं वाले |
| 216 | राघवानुचर | श्रीराम के अनुपम सेवक |
| 217 | कपिवर | वानरों में सर्वश्रेष्ठ |
| 218 | सागरोल्लंघनकर्ता | सागर को लांघने वाले |
| 219 | रावणदर्पहन्ता | रावण के अभिमान का नाश करने वाले |
| 220 | संजीवनिधर | संजीवनी पर्वत लाने वाले |
| 221 | लक्ष्मणप्राणदाता | लक्ष्मणजी को जीवन देने वाले |
| 222 | महाप्राज्ञ | अत्यंत बुद्धिमान |
| 223 | दुष्टदमन | दुष्टों का विनाश करने वाले |
| 224 | सच्चिदानंद | सत्य, चेतना और आनंद रूप |
| 225 | भक्तप्रिय | भक्तों को प्रिय |
| 226 | सर्वमंगलप्रद | मंगल प्रदान करने वाले |
| 227 | अनघ | निष्पाप |
| 228 | वेदविद् | वेदों के ज्ञाता |
| 229 | धर्मसेतु | धर्म की रक्षा करने वाले |
| 230 | संकटमोचन | संकटों का नाश करने वाले |
| 231 | विशालाक्ष | विशाल नेत्रों वाले |
| 232 | स्वर्णकाय | स्वर्ण समान देह वाले |
| 233 | महास्त्रधारक | दिव्य अस्त्रों के धारक |
| 234 | कामद | इच्छाएँ पूर्ण करने वाले |
| 235 | सिद्धिदाता | सिद्धियाँ देने वाले |
| 236 | सुग्रीवमित्र | सुग्रीव के प्रिय मित्र |
| 237 | रामकाजकर्ता | श्रीराम के कार्य करने में तत्पर |
| 238 | जटामुकुटधर | जटा वाला मुकुट धारण करने वाले |
| 239 | कपीश्वर | वानर सेना के ईश्वर |
| 240 | ज्ञानगम्य | ज्ञान के द्वारा ही प्राप्त होने वाले |
| 241 | भक्तिप्रिय | भक्ति से प्रसन्न होने वाले |
| 242 | अंतर्बाह्यरक्षक | भीतर और बाहर से सुरक्षा देने वाले |
| 243 | सर्वविघ्नहर | सभी विघ्नों का नाश करने वाले |
| 244 | कष्टहर | कष्टों को दूर करने वाले |
| 245 | परशक्ति निवारक | नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाले |
| 246 | महायुती | अपार सामर्थ्य से युक्त |
| 247 | प्रजापालक | जीवों की रक्षा करने वाले |
| 248 | धन्य | पूजनीय और सौभाग्यकारी |
| 249 | महाभक्त | श्रेष्ठ भक्त |
| 250 | रामबाणसेवक | श्रीराम के आदेशों का पालन करने वाले |
हनुमान त्रिशति – नाम 251 से 300
| क्रमांक | हनुमान जी का नाम | अर्थ / महत्व |
|---|---|---|
| 251 | शोकविनाशनाय नमः | जो भक्तों के शोक और दुख का नाश करते हैं |
| 252 | कर्मफलदायकाय नमः | जो कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं |
| 253 | उद्यमप्रदायकाय नमः | जो प्रयास और परिश्रम में बल देते हैं |
| 254 | राक्षसविदारकाय नमः | जो राक्षसों का संहार करने वाले हैं |
| 255 | परित्राताराय नमः | जो भक्तों को संकट से उबारते हैं |
| 256 | संकटमोचनाय नमः | जो सभी प्रकार के संकटों को दूर करते हैं |
| 257 | आरोग्यदायकाय नमः | जो स्वास्थ्य और ऊर्जा प्रदान करते हैं |
| 258 | सिद्धिदायकाय नमः | जो सिद्धियां और सफलताएं देते हैं |
| 259 | विजयप्रदायकाय नमः | जो विजयी बनाते हैं |
| 260 | भक्तवत्सलाय नमः | जो भक्तों पर सदा कृपा करते हैं |
| 261 | दोषनाशकाय नमः | जो ग्रह-दोष और बाधाओं का नाश करते हैं |
| 262 | महाबलाय नमः | अत्यंत शक्तिशाली |
| 263 | दुर्गतनिवारकाय नमः | जो हर दुर्भाग्य को दूर करते हैं |
| 264 | अव्ययाय नमः | जो अजर-अमर और अविनाशी हैं |
| 265 | वरप्रदायकाय नमः | जो वरदान देने वाले हैं |
| 266 | सिद्धसंकल्पाय नमः | जिनके संकल्प कभी विफल नहीं होते |
| 267 | दूतश्रेष्ठाय नमः | जो सर्वोत्तम दूत हैं |
| 268 | रामप्रियाय नमः | जिन्हें श्रीराम अत्यंत प्रिय हैं |
| 269 | रामकाजरताय नमः | जो सदैव रामकार्य में लगे रहते हैं |
| 270 | वज्रदेहाय नमः | जिनका शरीर वज्र समान है |
| 271 | दुष्टनिग्रहणाय नमः | जो दुष्टों का दमन करते हैं |
| 272 | करालरूपाय नमः | जो युद्ध में अत्यंत भयंकर रूप धारण करते हैं |
| 273 | अशोकवनविदारकाय नमः | जिन्होंने अशोकवन को उखाड़ फेंका |
| 274 | लंकादहनकर्त्रे नमः | जिन्होंने लंका का दहन किया |
| 275 | भीमवेगाय नमः | जिनकी गति अत्यंत तीव्र है |
| 276 | सर्वान्तर्यामिणे नमः | जो सभी के हृदय में व्याप्त हैं |
| 277 | वज्रनखाय नमः | जिनके नाखून वज्र समान शक्तिशाली हैं |
| 278 | वज्रमुखाय नमः | जिनका मुख तेजस्वी है |
| 279 | वज्रपाणये नमः | जिनके हाथ वज्र की तरह शक्तिशाली हैं |
| 280 | शत्रुभंजनाय नमः | जो शत्रुओं को परास्त करते हैं |
| 281 | बुद्धिप्रदायकाय नमः | जो बुद्धि और विवेक देते हैं |
| 282 | योगिनांपतये नमः | जो योगियों के स्वामी हैं |
| 283 | ज्ञानगम्याय नमः | जिन्हें ज्ञान द्वारा ही जाना जा सकता है |
| 284 | सर्वरोगनाशकाय नमः | जो हर रोग का नाश करते हैं |
| 285 | सर्वसुरक्षिताय नमः | जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं |
| 286 | परशत्रुनाशकाय नमः | जो बाहरी शत्रुओं का नाश करते हैं |
| 287 | अंतरितशत्रुनाशकाय नमः | जो भीतर के शत्रुओं (क्रोध, लोभ आदि) को नष्ट करते हैं |
| 288 | धर्मपालकाय नमः | जो धर्म की रक्षा करते हैं |
| 289 | कर्मयोगिप्रियाय नमः | कर्मयोग करने वालों को प्रिय |
| 290 | सर्वसिद्धिप्रदाय नमः | जो सभी सिद्धियाँ प्रदान करते हैं |
| 291 | कुलदोषनिवारकाय नमः | जो कुल-दोषों को दूर करते हैं |
| 292 | गृहशांतिप्रदायकाय नमः | जो घर में शांति स्थापित करते हैं |
| 293 | सौभाग्यवर्द्धनाय नमः | जो सौभाग्य बढ़ाते हैं |
| 294 | सर्वरत्नप्रदायकाय नमः | जो हर प्रकार की प्राप्ति कराते हैं |
| 295 | विघ्नहर्त्रे नमः | जो समस्त विघ्न दूर करते हैं |
| 296 | दुर्बलहन्त्रे नमः | जो नकारात्मक शक्तियों का नाश करते हैं |
| 297 | जितेन्द्रियाय नमः | जिन्होंने सभी इंद्रियों को जीत लिया |
| 298 | सत्यप्रतिष्ठिताय नमः | जो सत्य में सदैव स्थित हैं |
| 299 | मोक्षप्रदायकाय नमः | जो मुक्ति प्रदान करते हैं |
| 300 | अखिलविश्वमंगलप्रदायकाय नमः | जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड को मंगलकारी शक्ति देते हैं |
हनुमान त्रिशती नामावली का जाप करने से जीवन में शक्ति, साहस और भक्ति का दिव्य प्रकाश हमेशा बना रहता है।
Benefits of Trishati Namavali :
Fearlessness & courage
Protection from negative energies
Removal of obstacles & difficulties
Mental peace & focus
Blessings & guidance of Hanuman Ji
Spiritual upliftment and deeper devotion
त्रिशती नामावली के लाभ :
निर्भयता और साहस – भय और डर को दूर करके आंतरिक साहस बढ़ता है।
नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा – बुरी नजर, बुरी ऊर्जा और नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा मिलती है।
अवरोध और कठिनाइयों का नाश – जीवन की परेशानियाँ और बाधाएँ कम होती हैं।
मानसिक शांति और ध्यान – मन शांत और केंद्रित होता है, एकाग्रता बढ़ती है।
हनुमान जी का आशीर्वाद और मार्गदर्शन – उनके दिव्य आशीर्वाद से जीवन में सफलता और सुरक्षा मिलती है।
आध्यात्मिक उन्नति और गहरी भक्ति – आत्मिक विकास होता है और भक्ति की गहराई बढ़ती है।
