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    Sri Hanuman Bhakti Pravaha Mala ||

    श्री हनुमान भक्ति प्रवाह माला का अर्थ होता है हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति की एक निरंतर और अनवरत धारा। यह माला विशेष रूप से उन भक्तों के लिए होती है, जो हनुमान जी के चरणों में पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ अपनी भक्ति की यात्रा पर निकलते हैं। इस माला के […]

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    Sri Suktam || श्री सूक्तम् ||

    श्री सूक्त ॐ हिरण्यवर्णाम हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥१॥ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥२॥ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम्।श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मादेवी जुषताम्॥३॥ कांसोस्मितां हिरण्यप्राकारां आद्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वयेश्रियम्॥४॥ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियंलोके देव जुष्टामुदाराम्।तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे॥५॥ आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तववृक्षोथ बिल्व:।तस्य फलानि तपसानुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या […]

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    Santana Lakshmi Stotra || संतान लक्ष्मी स्तोत्र ||

    संतान लक्ष्मी स्तोत्र ॐ देवि संतनलक्ष्म्यै नमः। जय जय देवि संतनलक्ष्मिमाता भवानी नमो नमः।सकल जगत् की जननी तुम होसंतान सुखदायिनी नमो नमः॥ श्वेताम्बरधरा शुभ्रंश्वेतपद्मासनस्थिताम्।श्वेतमाल्यांबरधारिणींश्वेतगन्धानुलेपनाम्॥ पायसप्रियं संततिं दायिनींवरदां मंगलरूपिणीम्।पुत्रपौत्रप्रदां देवींसंतानलक्ष्मीं भजाम्यहम्॥ कराग्रकृतवक्षोजांकरपद्माभयप्रदाम्।हंसयुक्तविमानस्थांसंतानलक्ष्मीं नमाम्यहम्॥ आयुर्बलयशोमेधांसंपदं पुत्रपौत्रकाम्।संतानसुखदां नित्यंसंतानलक्ष्मीं नमाम्यहम्॥ नमस्ते देवि संतनलक्ष्मिगृहाण वरदान् मम।संततिं देहि मे नित्यंभवभयहरिणीं शुभाम्॥ यः पठेत् संतनलक्ष्मीस्तोत्रंश्रद्धया भक्तिसंयुतः।स लभेत् पुत्रसंतानंदीर्घायुः सुखमाप्नुयात्॥ Santana Lakshmi Stotra […]

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    Ashta Lakshmi Kavacham || अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम् ||

    अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम् आदिलक्ष्मि सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहॊदरि हेममये मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायनि, मञ्जुल भाषिणि वेदनुते । पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते जय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम् ॥ 1 ॥ धान्यलक्ष्मि अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते । मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते जय जयहे […]

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    Lakshmi Ashtottara Shatanama Stotra (108 Names) ||श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली||

    Lakshmi Ashtottara Shatanama Stotra (108 Names) नाम (संस्कृत) मंत्र (देवनागरी) English प्रकृति ॐ प्रकृत्यै नमः। Om Prakrityai Namah विकृति ॐ विकृत्यै नमः। Om Vikrityai Namah विद्या ॐ विद्यायै नमः। Om Vidyayai Namah सर्वभूतहितप्रदा ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः। Om Sarvabhutahitapradayai Namah श्रद्धा ॐ श्रद्धायै नमः। Om Shraddhayai Namah विभूति ॐ विभूत्यै नमः। Om Vibhutyai Namah सुरभि ॐ […]

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    Vyapar Vridhi Yantra | व्यापार वृद्धि यंत्र |

    व्यापार वृद्धि यंत्र: संतुलन, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक व्यापार में जब ऊर्जा संतुलित होती है,तो बाधाएँ कम होती हैं और अवसर बढ़ते हैं।”व्यापार वृद्धि यंत्र” इसी संतुलन को मजबूत करने का एक आध्यात्मिक माध्यम है। व्यापार वृद्धि यंत्र क्या है? व्यापार वृद्धि यंत्र (Vyapar Vriddhi Yantra) एक पवित्र वैदिक ज्यामितीय यंत्र है, जिसे विशेष […]

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    Kubera Gayatri – mornings ||कुबेर गायत्री मंत्र||

    कुबेर गायत्री मंत्र “ओम यक्ष राजाय विद्मय अलिकादिसाय दीमहे तन्ना कुबेर प्रीचोदयात्।” इस मंत्र का अर्थ यह है कि हम यक्षों के राजा और धन के देवता भगवान कुबेर को जानने और समझने का प्रयास करते हैं तथा उनके स्वरूप का ध्यान करते हैं। हम उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे हमारी बुद्धि को प्रेरित […]

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    Lakshmi Narayana Kavacham || श्री लक्ष्मीनारायण कवचम् ||

    | श्री लक्ष्मी नारायण कवचम्: दिव्य संरक्षण स्तोत्र | अधुना देवि वक्ष्यामि लक्ष्मीनारायणस्य ते ।कवचं मन्त्रगर्भं च वज्रपञ्जरकाख्यया ॥१॥ श्रीवज्रपञ्जरं नाम कवचं परमाद्भुतम् ।रहस्यं सर्वदेवानां साधकानां विशेषतः ॥२॥ यं धृत्वा भगवान् देवः प्रसीदति परः पुमान् ।यस्य धारणमात्रेण ब्रह्मा लोकपितामहः ॥३॥ ईश्वरोऽहं शिवो भीमो वासवोऽपि दिवस्पतिः ।सूर्यस्तेजोनिधिर्देवि चन्द्रर्मास्तारकेश्वरः ॥४॥ वायुश्च बलवांल्लोके वरुणो यादसाम्पतिः ।कुबेरोऽपि धनाध्यक्षो धर्मराजो […]

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    Sri Hanuman Sahasra Stotra || श्री हनुमान सहस्रनाम स्तोत्र ||

    हनूमान् श्रीप्रदो वायुपुत्रो रुद्रो नयोऽजरः। अमृत्युर्वीरवीरश्च ग्रामवासो जनाश्रयः॥1॥ धनदो निर्गुणाकारो वीरो निधिपतिर्मुनिः। पिङ्गाक्षो वरदो वाग्मी सीताशोकविनाशनः॥2॥ शिवः शर्वः परोऽव्यक्तो व्यक्ताव्यक्तो धराधरः। पिङ्गकेशः पिङ्गरोमा श्रुतिगम्यः सनातनः॥3॥ अनादिर्भगवान् दिव्यो विश्वहेतुर्नराश्रयः। आरोग्यकर्ता विश्वेशो विश्वनाथो हरीश्वरः॥4॥ भर्गो रामो रामभक्तः कल्याणप्रकृतीश्वरः। विश्वम्भरो विश्वमूर्तिर्विश्वाकारोऽथ विश्वपः॥5॥ विश्वात्मा विश्वसेव्योऽथ विश्वो विश्वधरो रविः। विश्वचेष्टो विश्वगम्यो विश्वध्येयःकलाधरः॥6॥ प्लवङ्गमः कपिश्रेष्ठो ज्येष्ठो वेद्यो वनेचरः। बालो वृद्धो युवा […]

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