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Remedywala

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नमामि हनुमन्तं च अर्जुनं रणधीरणम् ।
रामकृष्णसमायुक्तौ भक्तिवीर्यसमन्वितौ ॥१॥

अञ्जनीसुतमेकं च पाण्डुपुत्रं द्वितीयकम् ।
महाबलसमोपेतौ शत्रुनाशनतत्परौ ॥२॥

एको लङ्कादहं कृत्वा एको देवासुरैर्जितः ।
उभौ दिव्यधनुर्धारौ शरण्यौ भक्तवत्सलौ ॥३॥

हनुमान् भक्तिपूर्णात्मा अर्जुनो धर्मनिश्चयः ।
उभयोः कृपया नित्यं भयशोकविनाशनम् ॥४॥

स्मरणं यस्य कुर्वन्ति प्रातरुत्थाय मानवाः ।
नश्यन्ति तस्य पापानि सिद्ध्यन्ति च मनोरथाः ॥५॥

बलं बुद्धिं च वीर्यं च तेजो धैर्यं च देहिनाम् ।
प्रयच्छतो महावीरौ भक्तानां च विशेषतः ॥६॥

दुःखं दारिद्र्यनाशं च शत्रुबाधा-विनाशनम् ।
ग्रहपीडाहरं स्तोत्रं भवेदेतदनुत्तमम् ॥७॥

यो पठेत् भक्तिभावेन नित्यं स्तोत्रमिदं नरः ।
स सर्वान् कामान् आप्नोति हनुमत्-अर्जुनप्रसादतः ॥८॥

मैं भगवान राम के भक्त हनुमान और रणभूमि के धैर्यवान वीर अर्जुन को नमस्कार करता हूँ।
ये दोनों – राम और कृष्ण से जुड़े हुए, भक्ति और वीरता से परिपूर्ण हैं।

एक अंजनी का पुत्र हनुमान हैं और दूसरे पांडु के पुत्र अर्जुन।
दोनों महाबली हैं और सदा शत्रुओं का नाश करने में तत्पर रहते हैं।

एक ने (हनुमान ने) लंका को जला दिया और दूसरे (अर्जुन) ने देवों व असुरों को भी जीत लिया।
दोनों दिव्य धनुषधारी हैं, शरण देने वाले हैं और भक्तों से प्रेम करने वाले हैं।

हनुमान जी भक्ति से पूर्ण हैं और अर्जुन धर्म के प्रति अडिग हैं।
उन दोनों की कृपा से भय और शोक का नाश हो जाता है।जो मनुष्य सुबह उठकर इनका स्मरण करता है,
उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और उसके मन की इच्छाएँ पूरी होती हैं।

ये दोनों महावीर अपने भक्तों को विशेष रूप से
बल, बुद्धि, वीरता, तेज और धैर्य प्रदान करते हैं।जो व्यक्ति इस स्तोत्र का प्रतिदिन भक्तिपूर्वक पाठ करता है,
वह हनुमान और अर्जुन की कृपा से अपनी सभी इच्छाएँ प्राप्त करता है।

Description:
Main Bhagwan Ram ke bhakt Hanuman aur ranbhoomi ke dhairyavaan veer Arjun ko namaskar karta hoon.
Ye dono – Ram aur Krishna se jude hue, bhakti aur veerta se paripoorn hain.

Ek Anjani ka putra Hanuman hain aur doosre Pandu ke putra Arjun.
Dono mahaabali hain aur sada shatruon ka naash karne mein tatpar rehte hain.

Ek ne (Hanuman ne) Lanka ko jala diya aur doosre (Arjun) ne devon aur asuron ko bhi jeet liya.
Dono divya dhanushdhaari hain, sharan dene wale hain aur bhakton se prem karne wale hain.

Hanuman ji bhakti se poorn hain aur Arjun dharm ke prati adig hain.
Un dono ki kripa se bhay aur shok ka naash ho jata hai.
Jo manushya subah uthkar inka smaran karta hai,
uske paap nasht ho jate hain aur uske man ki ichchhaein poori hoti hain.

Ye dono mahaaveer apne bhakton ko vishesh roop se
bal, buddhi, veerta, tej aur dhairya pradan karte hain.
Jo vyakti is stotra ka pratidin bhaktipoorvak paath karta hai,
vah Hanuman aur Arjun ki kripa se apni sabhi ichchhaein praapt karta hai.

Hanuman Arjuna Stotra

हनुमान अर्जुन स्तोत्र का महत्व :-

हनुमान अर्जुन स्तोत्र का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें दो महान योद्धाओं — भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी और श्रीकृष्ण के परम सखा अर्जुन — की एक साथ वंदना की जाती है। यह स्तोत्र भक्ति + वीरता + धर्म का अद्भुत संगम है।रोग और संकट से सुरक्षित रखता है।

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नमामि हनुमन्तं च अर्जुनं रणधीरणम् ।
रामकृष्णसमायुक्तौ भक्तिवीर्यसमन्वितौ ॥१॥

अञ्जनीसुतमेकं च पाण्डुपुत्रं द्वितीयकम् ।
महाबलसमोपेतौ शत्रुनाशनतत्परौ ॥२॥

एको लङ्कादहं कृत्वा एको देवासुरैर्जितः ।
उभौ दिव्यधनुर्धारौ शरण्यौ भक्तवत्सलौ ॥३॥

हनुमान् भक्तिपूर्णात्मा अर्जुनो धर्मनिश्चयः ।
उभयोः कृपया नित्यं भयशोकविनाशनम् ॥४॥

स्मरणं यस्य कुर्वन्ति प्रातरुत्थाय मानवाः ।
नश्यन्ति तस्य पापानि सिद्ध्यन्ति च मनोरथाः ॥५॥

बलं बुद्धिं च वीर्यं च तेजो धैर्यं च देहिनाम् ।
प्रयच्छतो महावीरौ भक्तानां च विशेषतः ॥६॥

दुःखं दारिद्र्यनाशं च शत्रुबाधा-विनाशनम् ।
ग्रहपीडाहरं स्तोत्रं भवेदेतदनुत्तमम् ॥७॥

यो पठेत् भक्तिभावेन नित्यं स्तोत्रमिदं नरः ।
स सर्वान् कामान् आप्नोति हनुमत्-अर्जुनप्रसादतः ॥८॥

मैं भगवान राम के भक्त हनुमान और रणभूमि के धैर्यवान वीर अर्जुन को नमस्कार करता हूँ।
ये दोनों – राम और कृष्ण से जुड़े हुए, भक्ति और वीरता से परिपूर्ण हैं।

एक अंजनी का पुत्र हनुमान हैं और दूसरे पांडु के पुत्र अर्जुन।
दोनों महाबली हैं और सदा शत्रुओं का नाश करने में तत्पर रहते हैं।

एक ने (हनुमान ने) लंका को जला दिया और दूसरे (अर्जुन) ने देवों व असुरों को भी जीत लिया।
दोनों दिव्य धनुषधारी हैं, शरण देने वाले हैं और भक्तों से प्रेम करने वाले हैं।

हनुमान जी भक्ति से पूर्ण हैं और अर्जुन धर्म के प्रति अडिग हैं।
उन दोनों की कृपा से भय और शोक का नाश हो जाता है।जो मनुष्य सुबह उठकर इनका स्मरण करता है,
उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और उसके मन की इच्छाएँ पूरी होती हैं।

ये दोनों महावीर अपने भक्तों को विशेष रूप से
बल, बुद्धि, वीरता, तेज और धैर्य प्रदान करते हैं।जो व्यक्ति इस स्तोत्र का प्रतिदिन भक्तिपूर्वक पाठ करता है,
वह हनुमान और अर्जुन की कृपा से अपनी सभी इच्छाएँ प्राप्त करता है।

Description:
Main Bhagwan Ram ke bhakt Hanuman aur ranbhoomi ke dhairyavaan veer Arjun ko namaskar karta hoon.
Ye dono – Ram aur Krishna se jude hue, bhakti aur veerta se paripoorn hain.

Ek Anjani ka putra Hanuman hain aur doosre Pandu ke putra Arjun.
Dono mahaabali hain aur sada shatruon ka naash karne mein tatpar rehte hain.

Ek ne (Hanuman ne) Lanka ko jala diya aur doosre (Arjun) ne devon aur asuron ko bhi jeet liya.
Dono divya dhanushdhaari hain, sharan dene wale hain aur bhakton se prem karne wale hain.

Hanuman ji bhakti se poorn hain aur Arjun dharm ke prati adig hain.
Un dono ki kripa se bhay aur shok ka naash ho jata hai.
Jo manushya subah uthkar inka smaran karta hai,
uske paap nasht ho jate hain aur uske man ki ichchhaein poori hoti hain.

Ye dono mahaaveer apne bhakton ko vishesh roop se
bal, buddhi, veerta, tej aur dhairya pradan karte hain.
Jo vyakti is stotra ka pratidin bhaktipoorvak paath karta hai,
vah Hanuman aur Arjun ki kripa se apni sabhi ichchhaein praapt karta hai.

Hanuman Arjuna Stotra

हनुमान अर्जुन स्तोत्र का महत्व :-

हनुमान अर्जुन स्तोत्र का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि इसमें दो महान योद्धाओं — भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी और श्रीकृष्ण के परम सखा अर्जुन — की एक साथ वंदना की जाती है। यह स्तोत्र भक्ति + वीरता + धर्म का अद्भुत संगम है।रोग और संकट से सुरक्षित रखता है।

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