हिंदू धर्म में, हनुमान जी को बल, बुद्धि और विद्या का प्रतीक माना जाता है। वह भगवान श्री राम के परम भक्त हैं और उन्हें संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। हनुमान जी की स्तुति के लिए कई शक्तिशाली स्तोत्र और मंत्र हैं, जिनमें से हनुमान मंगलाष्टकम एक अत्यंत प्रभावशाली पाठ है।
यह मंगलाष्टकम न केवल हनुमान जी की महिमा का बखान करता है, बल्कि भक्तों को जीवन के सभी संकटों और बाधाओं से मुक्ति दिलाने का भी मार्ग प्रशस्त करता है।
हनुमान मंगलाष्टकम?
मंगलाष्टकम का अर्थ है आठ श्लोकों का संग्रह जो मंगल या शुभता की कामना के लिए पाठ किया जाता है। हनुमान मंगलाष्टकम में कुल आठ श्लोक हैं, जिनमें पवनपुत्र हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों, गुणों और उनके मंगलकारी कार्यों का वर्णन किया गया है। प्रत्येक श्लोक उनकी दिव्यता और शक्ति को समर्पित है, और इसका पाठ करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा मिलती है।
वैशाखे मासि कृष्णायां दशम्यां मांडवासरे।
पूर्वाभाद्रप्रभुताय मंगलं श्रीहनुमते ॥
-इस श्लोक में बताया गया है कि वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि, जो मांडव नामक मंगलवार के दिन और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र से युक्त होती है, वह हनुमान जी के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस विशेष योग में हनुमान जी की पूजा-अर्चना, मंत्र-जप या व्रत करना अत्यंत मंगलकारी और फलदायी माना जाता है। यह श्लोक मूलतः उस शुभ समय का वर्णन करता है जो श्री हनुमान जी की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
करुणारसपूर्णाय फलोपप्रियाय च।
माणिकहारकण्ठाय मंगलं श्रीहनुमते
-इस श्लोक में भगवान हनुमान को करुणा से परिपूर्ण, भक्तों को फल देने वाले तथा गले में माणिक्य (माणिक) की माला धारण करने वाले देव रूप में नमस्कार किया गया है। भक्त कहता है कि ऐसे दयालु, कृपालु और रक्षक श्री हनुमान जी पर सदैव मंगल हो। यह श्लोक हनुमान जी की दिव्य महिमा, उनकी करुणा और उनकी रक्षक-सुलभ कृपा का वर्णन करता है।
सुवर्चलाकलत्राय चतुर्भुजाय च।
उष्टरारूढ़ाय वीराय मङ्गलं श्रीहनुमते
इस श्लोक में हनुमान जी को सुवर्चला नाम की शक्ति (देवी) के साथ, चार भुजाओं वाले दिव्य रूप में, और ऊँट (उष्ट्र) पर आरूढ़ वीर स्वरूप में नमस्कार किया गया है। इसमें बताया गया है कि हनुमान जी अनेक रूपों में भक्तों की रक्षा करते हैं—कभी शांत, कभी विशाल, तो कभी तेजस्वी योद्धा के रूप में। ऐसे पराक्रमी, शक्तिशाली और सदैव रक्षक हनुमान जी पर मंगल की कामना की गई है।
दिव्यमङ्गलदेहाय पीताम्बरधराय च।
तप्तकाञ्चनवर्णाय मंगलं श्रीहनुमते
इस श्लोक में हनुमान जी के दिव्य और शुभ शरीर की स्तुति की गई है। उन्हें पीले वस्त्र (पीताम्बर) धारण करने वाले तथा तपे हुए सोने के समान उज्ज्वल, गेहुँआ और चमकदार वर्ण वाले रूप में नमस्कार किया गया है। यह श्लोक बताता है कि हनुमान जी का स्वरूप स्वयं में ही शुभ, तेजोमय और कल्याणकारी है। ऐसे प्रभामय, दिव्य तेज से युक्त श्री हनुमान जी पर मंगल की कामना की गई है।
भक्तरक्षाशीलाय जानकीशोकहारिणे।
ज्वलत्पावकनेत्राय मङ्गलं श्रीहनुमते
इस श्लोक में हनुमान जी को भक्तों की रक्षा करने वाले, माता जानकी के शोक को दूर करने वाले तथा अग्नि के समान तेजस्वी और ज्वलंत नेत्रों वाले रूप में नमस्कार किया गया है। यह बताता है कि हनुमान जी अपने भक्तों के दुख हरने वाले और अत्यंत वीर, तेज से भरे हुए देव हैं। ऐसे दयालु और शक्तिशाली हनुमान जी पर मंगल की कामना की गई है।
पंपतीर्विहाराय सौमित्रिप्राणदायिने।
सृष्टिकरणभूताय मंगलं श्रीहनुमते
इस श्लोक में हनुमान जी को पंपा सरोवर के आसपास विहार करने वाले, लक्ष्मण (सौमित्रि) को जीवन देने वाले तथा ब्रह्माण्ड की सृष्टि में सहायक दिव्य शक्ति के रूप में नमस्कार किया गया है। यह बताता है कि हनुमान जी केवल वीर ही नहीं, बल्कि जीवनदाता, पालनकर्ता और सृष्टि-संचालन में सहायक तेजस्वी शक्ति भी हैं। ऐसे कल्याणकारी और सर्वशक्तिमान हनुमान जी पर मंगल की कामना की गई है।
सर्वलोकनाथाय मंगलं श्रीहनुमते
कौण्डिन्यगोत्रजाताय मंगलं श्रीहनुमते
पूर्वाभाद्रप्रभूताय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ १ ॥
pūrvābhādraprabhūtāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 1 ..
Who was born in the month of Visaka,
On the tenth day of the rising moon,
On a Saturday on Poorva bhadra star.
माणिक्यहारकण्ठाय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ २ ॥
māṇikyahārakaṇṭhāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 2 ..
Who has respect for his teachers,
Who likes sweets prepared out of fruits,
And whose different hands are decorated by gems.
उष्ट्रारूढाय वीराय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ३ ॥
uṣṭrārūḍhāya vīrāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 3 ..
Who is the consort of Suvarchala,
Who has four arms,
And who is the hero who rides,
On a beam of light.
तप्तकाञ्चनवर्णाय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ४ ॥
taptakāñcanavarṇāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 4 ..
Who has a blessed holy body,
Who wears the yellow silk,
And who is of the colour of molten gold.
ज्वलत्पावकनेत्राय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ५ ॥
jvalatpāvakanetrāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 5 ..
Who is known to save his devotees,
Who destroyed the sorrow of Janaki,
And who has the purest eyes of the world.
सृष्टिकारणभूताय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ६ ॥
sṛṣṭikāraṇabhūtāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 6 ..
Who lives in the shores of Pampa river,
Who saved the life of Lakshmana,
And who is in the throat of the whole world.
सर्वलोकैकनाथाय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ७ ॥
sarvalokaikanāthāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 7 ..
Who lived in the forests of Rampa,
Who lived with pleasant happy people,
And who is in the throat of the whole world.
कौण्डिन्यगोत्रजाताय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ८ ॥
kauṇḍinyagotrajātāya maṅgalaṃ śrīhanūmate .. 8 ..
Who has five faces, who is gross,
Who killed Kalanemi,
And who belonged to the Koundinya clan.
Hindu dharm mein, Hanuman ji ko bal, buddhi aur vidya ka prateek maana jaata hai. Vah Bhagwan Shri Ram ke param bhakt hain aur unhein Sankatmochan ke roop mein pooja jaata hai. Hanuman ji ki stuti ke liye kai shaktishali stotra aur mantra hain, jinmein se Hanuman Mangalashtakam ek atyant prabhavshali paath hai.
Yeh Mangalashtakam na keval Hanuman ji ki mahima ka bakhan karta hai, balki bhakton ko jeevan ke sabhi sankaton aur baadhaon se mukti dilane ka bhi marg prashast karta hai.
Hanuman Mangalashtakam kya hai? Mangalashtakam ka arth hai aath shlokon ka sangrah jo mangal ya shubhata ki kamna ke liye paath kiya jaata hai. Hanuman Mangalashtakam mein kul aath shlok hain, jinmein Pawanputra Hanuman ji ke vibhinn swaroopon, gunon aur unke mangalkari karyon ka varnan kiya gaya hai. Pratyek shlok unki divyata aur shakti ko samarpit hai, aur iska paath karne se bhakton ko sakaratmak oorja aur suraksha milti hai.
