Śrī Āpaduddhāraka Hanumat Stotram
श्री आपदुद्धारक हनुमत् स्तोत्रम्
विनियोगः
ॐ अस्य श्रीआपदुद्धारक हनुमत् स्तोत्र महामन्त्र कवचस्य ।
विभीषण ऋषिः ।
हनुमान् देवता ।
सर्वापदुद्धारक श्रीहनुमत्प्रसादेन
मम सर्वापन्निवृत्त्यर्थे सर्वकार्यअनुकूल्यसिद्ध्यर्थे
जपे विनियोगः ॥
ध्यानम्
वामे करे वैरिभिदं वहन्तं
शैलं परे शृंखलहारिताङ्कम् ।
दधानमच्छच्छवियज्ञसूत्रं
भजे ज्वलत्कुण्डलमञ्जनेयम् ॥ १ ॥
संवीतकौपीन मुदञ्चिताङ्गुलिं
समुज्ज्वलन्मौञ्जीमथोपवीतिनम् ।
सकुण्डलं लम्बिशिखासमावृतं
तमञ्जनेयं शरणं प्रपद्ये ॥ २ ॥
Śrī Āpaduddhāraka Hanumat Stotram – Sanskrit, Hindi Arth & English Meaning
| श्लोक (Sanskrit) | Hindi अर्थ (भावार्थ) | English Meaning |
|---|---|---|
| विनियोगःॐ अस्य श्रीआपदुद्धारक हनुमत् स्तोत्र महामन्त्र कवचस्य… जपे विनियोगः ॥ | मैं इस स्तोत्र का जाप करता हूँ ताकि श्रीहनुमान जी की कृपा से सभी आपदाएँ दूर हों और कार्य सफल हों। | This hymn is recited to seek Lord Hanuman’s grace for removal of calamities and success in all endeavors. |
| ध्यानम् १वामे करे वैरिभिदं वहन्तं… भजे ज्वलत्कुण्डलमञ्जनेयम् ॥ | मैं श्रीहनुमान जी का ध्यान करता हूँ जो शत्रुनाशक हैं, पर्वत धारण करते हैं और दिव्य तेज से युक्त हैं। | I meditate upon Hanuman, destroyer of enemies, bearer of the mountain, radiant and divine. |
| ध्यानम् २संवीतकौपीन मुदञ्चिताङ्गुलिं… तमञ्जनेयं शरणं प्रपद्ये ॥ | कौपीनधारी, वर मुद्रा में हाथ उठाए हुए, अंजनेय की मैं शरण लेता हूँ। | Wearing a loincloth and blessing devotees, I seek refuge in Anjaneya. |
| श्लोक ३आपन्नाखिललोककर्तृहरिणे श्रीहनूमते ।अकस्मादागतौत्पातनाशनाय नमो नमः ॥ | हे श्रीहनुमान! आप सभी लोकों के संकटों और अचानक आने वाली आपदाओं को नष्ट करने वाले हैं। | O Hanuman, remover of all sufferings and destroyer of sudden calamities, salutations to you. |
| श्लोक ४सीतावियुक्तश्रीरामशोकदुःखभयापह ।तापत्रयसंहारिन् अञ्जनेय नमोऽस्तु ते ॥ | आपने सीतावियोग से दुखी श्रीराम के शोक को हर लिया और तीनों तापों का नाश किया। | You removed Rama’s sorrow caused by separation from Sita and destroy the threefold sufferings. |
| श्लोक ५दुष्टग्रहादिविनाशकारिणे… हनूमते नमो नमः ॥ | आप दुष्ट ग्रहों, रोगों और अरिष्टों का नाश करने वाले हैं। | Salutations to Hanuman, destroyer of evil planets, diseases, and misfortunes. |
| श्लोक ६भूतप्रेतपिशाचादि… त्राताऽसि वायुनन्दन ॥ | भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से पीड़ित लोगों के आप रक्षक हैं। | O son of the Wind God, you protect those afflicted by spirits and negative forces. |
| श्लोक ७स्मरतां संकटे नित्यं… दुःखदारिद्र्यसंयुताम् ॥ | संकट में आपका स्मरण करने वाले के रोग, दुःख और दरिद्रता आप शीघ्र नष्ट करते हैं। | Those who remember you in distress are freed from disease, sorrow, and poverty. |
| श्लोक ८य इदं पठते स्तोत्रं… सुखी भवति मानवः ॥ | श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करने वाला व्यक्ति सभी आपदाओं से मुक्त होता है। | One who recites this hymn with devotion becomes free from all calamities and lives happily. |
| फलश्रुतिइदं स्तोत्रं महापुण्यं… कदाचिदपि कुत्रचित् ॥ | जो इसे नित्य पढ़ता है, उसके जीवन में कभी भय नहीं रहता। | One who recites this sacred hymn regularly is never overcome by fear. |
फलश्रुति – भावार्थ
जो मनुष्य इस पुण्य स्तोत्र का तीनों संध्याओं में पाठ करता है, उसके जीवन में कभी भी, कहीं भी भय उत्पन्न नहीं होता।
Phalaśruti – Meaning
One who recites this sacred hymn thrice daily is never overcome by fear at any time or place.
