“हनुमान प्रातः स्मरण स्तोत्रम्” एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है जिसे सुबह उठते ही पढ़ना अत्यंत शुभ माना गया है। प्रातःकाल में हनुमानजी का स्मरण करने से मन, शरीर और जीवन में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। यह स्तोत्र हनुमानजी के अद्भुत पराक्रम, भक्ति, दया और रक्षा-शक्ति का वर्णन करता है, और इसे पढ़ने वाले व्यक्ति को दिनभर सुरक्षा, उत्साह, आत्मविश्वास और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रातः स्मरामि हृदि संस्फुर्दात्मत्त्वं सच्चित्सुखं परमहंसगतिं तुरीयम्। यत्स्वप्नजागरसुषुपतिमवैति नित्यं तद्ब्रह्म निष्कलमहं न च भूतसङ्घः ॥1॥
प्रातर्भाजामि मनसा वाचसामगम्यं वाचो विभान्ति निखिला यदनुगृहेन।
यन्नेतिनेतिवचनैर्निग्मा अवोचं
स्तं देवदेवमजमच्युतमाहुग्रग्यम् ॥2॥
प्रातर्नमामि तमसः परमर्कवर्णं
पूर्ण सनातनपदं उत्तमाख्यमा
यस्मिन्निदं जगदशेषमशेषमूरतौ
रज्ज्वां भुजंगम इव प्रतिभासितं वै ॥3॥
श्लोकत्रयमिदं पुण्यं लोकत्रयविभूषणम्।
प्रातःकाले पठेद्यस्तु स गच्छेत्परमं पदम् ॥
Pratah smarami hridi samsphuradatmattvam sacchitsukham paramahamsagatim turiyam।
Yat svapnajaragarasushuptimavaitin nityam tadbrahma nishkalam aham na cha bhutasanghah ॥1॥
Pratar bhajami manasa vaachasam agamyam
Vaacho vibhanti nikhila yadanugrihena।
Yan neti-neti vachanair nigama avochan
Stam devadevam ajam achyutam ahur agryam
॥2॥
Pratar namami tamasah paramarka-varnam
Poorna sanatanapadam uttamakhyam।
Yasminnidam jagadashesham asheshamoortau
Rajjvaam bhujangam iva pratibhasitam vai ॥3॥
Shloka-trayam idam punyam lokatraya-vibhushanam।
Pratah kale pathed yastu sa gacchet paramam padam ॥
प्रातःकाले हनुमान प्रातः स्मरण स्तोत्र का पाठ करें और अपने जीवन को साहस, शक्ति और भक्तिभाव से परिपूर्ण बनाएं।
