Pavana Putra Hanuman Stotra – अर्थ, लाभ, स्तुति और सम्पूर्ण श्लोक
Pavanaputra Hanuman is the embodiment of strength, brilliance, wisdom, and unwavering devotion. In the tradition of bhakti, Hanumanji is revered as the remover of obstacles and sorrows (Sankatmochan). This Pavana Putra Hanuman Stotra is a concise yet powerful hymn. Reciting it helps increase mental strength, reduces fear, and brings positive, uplifting energy into one’s life.
On this page, you will find the complete stotra (in Sanskrit), Roman transliteration, line-by-line Hindi and English meanings, chanting method, benefits, and frequently asked questions — so that you can read and share it with proper devotion and understanding.
पवनपुत्र हनुमान—शक्ति, तेज, बुद्धि और निष्ठा के प्रतीक। भक्त-परंपरा में हनुमानजी को संकटमोचन कहा जाता है। यह पाना-पुत्र हनुमान स्तोत्र एक संक्षिप्त, प्रभावी स्तुति है जिसे पढ़ने से मनोबल बढ़ता, भय कम होता और सकारात्मक ऊर्जा आती है। इस पेज पर आपको पूरा श्लोक (Sanskrit), रोमन लिपि (transliteration), हर श्लोक का हिंदी व अंग्रेज़ी अर्थ, पाठ-विधि, लाभ और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न मिलेंगे — ताकि आप इसे सही श्रद्धा के साथ पढ़/साझा कर सकें।

Pavana Putra Hanuman Stotra (संपूर्ण श्लोक)
| पवनपुत्र हनुमान स्तोत्रम्
(Sanskrit / हिंदी देवनागरी) |
Meaning — हिंदी |
Meaning — English |
| प्रनवउं पवनकुमार खलवनपावक ज्ञानघन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥ |
हे पवनपुत्र! आप दुष्टों के वन को अग्नि की तरह भस्म करते हैं और अज्ञान को नष्ट करते हैं। आपके हृदय में श्रीराम (धनुष-बाण सहित) स्थिर रहते हैं। | Salutation to the Wind-god’s son who burns the forest of evil like fire and destroys ignorance; Lord Rama, with bow and arrow, dwells in his heart. |
| अनत बल भण्डार सुवर्ण पर्वत निकाय। दानव कुल काम दाहि बुद्धि बेष्ट गुण ग्राय॥ |
आप अनन्त शक्ति के भण्डार हैं; आपका शरीर स्वर्ण-पर्वत समान है। आप दैत्य-बल को भस्म करते हैं और बुद्धि व गुणों के धनी हैं। | Infinite storehouse of strength, body like a golden mountain; you burn the demonic line like fire and embody supreme wisdom and virtues. |
| गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसम्। रामायणमहामालारत्नं वन्देऽनिलात्मजम्॥ |
जिसने समुद्र को छोटे-से पदचिन्ह समान किया और राक्षसों को मच्छर की भांति पराजित किया—ऐसे रामायण-महामाला के रत्न, पवनात्मज को मैं नमन करता हूँ। | He who made the ocean as small as a cow’s hoofprint and made demons appear like mosquitoes; jewel of the Ramayana garland — I bow to the Wind-god’s son. |
| आञ्जनेयमतिपाटलाननं काञ्चनाद्रिकमनीयविग्रहम्। पारिजाततरूमूलवासिनं भावयामि पवमाननन्दनम्॥ |
अंजना के पुत्र का मुख लाल कमल-सा, शरीर स्वर्ण-पर्वत जैसा, पारिजात वृक्ष के मूल के नीचे रहने वाला — मैं उस पवननंदन का ध्यान करता हूँ। | I meditate upon Anjaneya with lotus-like face and golden-mountain form, dwelling at the root of the Parijata tree—the joyous son of the Wind-god. |
|
अञ्जनानन्दनं वीरं जानकीशोकनाशनम्। |
अंजना के वीर पुत्र, जानकी के दुःख को नष्ट करने वाले, वानरराज, अक्षकुमारी का हन्ता और लंका के भयकारी — मैं उन्हें प्रणाम करता हूँ। | I salute the heroic son of Anjana, destroyer of Sita’s sorrow, lord of monkeys, slayer of Aksha, and terror of Lanka. |
Benefits of Pavana Putra Hanuman Stotra (लाभ)
- मानसिक तनाव दूर करता है
- शत्रु बाधा व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
- आत्मविश्वास और साहस बढ़ाता है
- कार्य में सफलता और ऊर्जा वृद्धि
- ग्रह दोष व नजर दोष दूर करता है
How to Recite (कैसे पढ़ें)
- स्नान करके, स्वच्छ कपड़े पहनें।
- हनुमान जी की मूर्ति/चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
- मन को शांत करके स्तोत्र को श्रद्धा और भक्ति से पढ़ें।
- शुरुआत में “ॐ श्री हनुमते नमः” का जाप करें।
- स्टोत्र का पाठ 3 या 11 बार करना शुभ होता है।
Best Time & Rules (सबसे अच्छा समय और नियम)
| समय | क्यों शुभ है |
|---|---|
| मंगलवार | हनुमान जी का वार |
| शनिवार | शनि बाधा से मुक्ति |
| सुबह ब्रह्म मुहूर्त | मन सबसे शांत |
| संध्या समय | ऊर्जा संतुलन |
नियम:
- क्रोध, तनाव या उदासी में भी पाठ किया जा सकता है
- मन में शुद्ध भावना होनी चाहिए
Conclusion (निष्कर्ष) : Pavana Putra Hanuman Stotra एक दिव्य आध्यात्मिक कवच है। इसे श्रद्धा से पढ़ने वाला व्यक्ति जीवन में शक्ति, साहस, स्थिरता और सफलता पाता है। भय, बाधा और नकारात्मकता दूर होकर सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
