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Hanuman Chaturdasha Stotra भगवान हनुमान जी की स्तुति में रचा गया 14 श्लोकों (चतुर्दश = 14) वाला एक प्राचीन संस्कृत स्तोत्र है। माना जाता है कि इसे तानाशाहों, भय, रोग, बाधा, नकारात्मक शक्तियों और संकटों से रक्षा के लिए पढ़ा जाता है। इसे पढ़ने से मन में बल, बुद्धि, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।

यह स्तोत्र कई परंपराओं में अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और अक्सर इसे मंगलवार, शनिवार या विशेष हनुमान-व्रत के दिनों में पढ़ा जाता है।

इसे पाठ करने से शक्ति, साहस, संकटमोचन और शत्रु नाश में विशेष लाभ होता है।

नीचे मैं इसे पारंपरिक रूप में दे : 

हनुमान चतुर्दश स्तोत्र (Hanuman Chaturdasha Stotra)

ॐ नमो हनुमते रघुनाथप्रियाय।
ॐ हनुमन्तं चतुर्दश नामभिरुद्राक्षरं पूजयेत्।
सर्वदुःखविनाशनं सर्वरोगनाशनं च।

१. अञ्जनिपुत्रं वानरं वीरं बलवन्तं।
२. महावीरं संकटमोचनं रक्षमाननम्।
३. रामदूतं पवनसुतं भूतपिशाचनाशनम्।
४. कपिंन्द्रं भीमबलं सर्वविघ्ननाशकं।
५. बालाजीं महाबलं दशग्रीवसहितं।
६. मारुतिं कीर्तिमन्तं प्रचण्डरूपं च।
७. अञ्जनसम्भूतं प्रीतिप्रदं भक्तवत्सलम्।
८. केसरीसुतं महावीर्यं ज्ञानविज्ञानं समृद्धम्।
९. लङ्कादहनं कृपालुं भूतनाथं रक्षकं।
१०. वज्रपाणिं महावीर्यं सर्वसिद्धिप्रदायकम्।
११. पिङ्गाक्षं च तेजस्विं भीमं धर्मपरायणम्।
१२. कपिसुतं सुग्रीवहितं संकटसंतापनाशकं।
१३. हनुमन्तं जयजयकारं भक्तानां रक्षणाय।
१४. रामभक्तं सर्वसिद्धिं प्रदातुं नमाम्यहम्।

Hanuman Chaturdasha Stotra

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Hanuman Chaturdasha Stotra भगवान हनुमान जी की स्तुति में रचा गया 14 श्लोकों (चतुर्दश = 14) वाला एक प्राचीन संस्कृत स्तोत्र है। माना जाता है कि इसे तानाशाहों, भय, रोग, बाधा, नकारात्मक शक्तियों और संकटों से रक्षा के लिए पढ़ा जाता है। इसे पढ़ने से मन में बल, बुद्धि, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।

यह स्तोत्र कई परंपराओं में अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और अक्सर इसे मंगलवार, शनिवार या विशेष हनुमान-व्रत के दिनों में पढ़ा जाता है।

इसे पाठ करने से शक्ति, साहस, संकटमोचन और शत्रु नाश में विशेष लाभ होता है।

नीचे मैं इसे पारंपरिक रूप में दे : 

हनुमान चतुर्दश स्तोत्र (Hanuman Chaturdasha Stotra)

ॐ नमो हनुमते रघुनाथप्रियाय।
ॐ हनुमन्तं चतुर्दश नामभिरुद्राक्षरं पूजयेत्।
सर्वदुःखविनाशनं सर्वरोगनाशनं च।

१. अञ्जनिपुत्रं वानरं वीरं बलवन्तं।
२. महावीरं संकटमोचनं रक्षमाननम्।
३. रामदूतं पवनसुतं भूतपिशाचनाशनम्।
४. कपिंन्द्रं भीमबलं सर्वविघ्ननाशकं।
५. बालाजीं महाबलं दशग्रीवसहितं।
६. मारुतिं कीर्तिमन्तं प्रचण्डरूपं च।
७. अञ्जनसम्भूतं प्रीतिप्रदं भक्तवत्सलम्।
८. केसरीसुतं महावीर्यं ज्ञानविज्ञानं समृद्धम्।
९. लङ्कादहनं कृपालुं भूतनाथं रक्षकं।
१०. वज्रपाणिं महावीर्यं सर्वसिद्धिप्रदायकम्।
११. पिङ्गाक्षं च तेजस्विं भीमं धर्मपरायणम्।
१२. कपिसुतं सुग्रीवहितं संकटसंतापनाशकं।
१३. हनुमन्तं जयजयकारं भक्तानां रक्षणाय।
१४. रामभक्तं सर्वसिद्धिं प्रदातुं नमाम्यहम्।

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