.

Remedywala

Categories
Archives
Black Onyx Bracelet 8mm
Black Onyx Bracelet 8mm
₹999₹348
Shop Now
Howlite Bracelet (Diamond Cut Tumble)
Howlite Bracelet (Diamond Cut Tumble)
₹1999₹799
Shop Now
Lepidolite Double Terminated Pendant
Lepidolite Double Terminated Pendant
₹996₹267
Shop Now
Black Banded Agate Bracelet 8mm
Black Banded Agate Bracelet 8mm
₹1499₹708
Shop Now
Amazonite Bracelet (Round Tumbled) – Remedywala
Amazonite Bracelet (Round Tumbled) – Remedywala
₹999₹537
Shop Now
Black Obsidian Transparent 8mm Mala – Remedywala
Black Obsidian Transparent 8mm Mala – Remedywala
₹1499₹888
Shop Now

वडवानल स्तोत्रम् क्या है?

“वडवानल” का अर्थ है—समुद्र के भीतर की प्रचंड अग्नि। इस स्तोत्र में हनुमान जी को उस अग्नि की तरह बताया गया है जो सभी संकटों को जलाकर समाप्त कर देती है। यह स्तोत्र भगवान हनुमान की अपार शक्ति और उनकी कृपा की महिमा का वर्णन करता है।

Hanuman Vadvanal Stotra

-ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः,
श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं,
मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे,
सकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम्,
आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थं,
श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये।

ध्यान
-मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।

-ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम
सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय
वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र
उदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र
अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार
सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद
सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन डाकिनी-शाकिनी-विध्वंसन

-ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दुःखनिवारणाय
ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन
भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर
चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर,
माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस
भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।

– ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां
ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं
ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां
शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर
आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय
शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय
प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा।

– ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन
परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु
शिरः-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय
नागपाशानन्त-वासुकि-तक्षक-कर्कोटकालियान्
यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा।

– ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते
राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र
पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासयनाशय
नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा।।।

इति विभीषणकृतं हनुमद् वडवानल स्तोत्रं ।।

  • इस श्री हनुमान् वडवानल स्तोत्र मंत्र के ऋषि (रचयिता/द्रष्टा) श्रीरामचन्द्र हैं, इसकी देवता (अराध्य) श्रीहनुमान् वडवानल हैं। इसमें ‘ह्रां’ को बीज (मूल शक्ति), ‘ह्रीं’ को शक्ति (ऊर्जा), और ‘सौं’ को कीलक (स्थायित्व प्रदान करने वाला तत्व) माना गया है।
  • यह श्लोक भगवान हनुमान जी के स्वरूप, गुणों और उनकी विशेषताओं का वर्णन करता है, और अंत में उनके चरणों में शरणागति (आश्रय) लेने की अभिव्यक्ति है। इस श्लोक का अर्थ है: मैं उन हनुमान जी की शरण लेता हूँ|
  • यह स्तोत्र-अंश शक्तिशाली बीजाक्षरों “ॐ ह्रां ह्रीं ॐ” के साथ भगवान श्री महा-हनुमान को नमस्कार करता है, जो अपने प्रकट पराक्रम (प्रत्यक्ष शक्ति) के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी कीर्ति (यश) रूपी विस्तार ने समस्त दिशाओं और तीनों लोकों को उज्जवल कर दिया है। उन्हें वज्र के समान देह वाला रुद्रावतार (शिव का अंश) बताया गया है। 
  • यह श्लोक “ॐ ह्रां ह्रीं ॐ” बीजाक्षरों के साथ भगवान महावीर वीर हनुमान जी को नमस्कार करता है, जिनका मुख्य उद्देश्य सभी दुःखों का निवारण करना है। इस मंत्रांश में हनुमान जी से विशेष रूप से यह प्रार्थना की गई है कि वे: ग्रह-मण्डल, सर्व-भूत-मण्डल, सर्व-पिशाच-मण्डलों का उच्चाटन (उखाड़ फेंकना या दूर करना) करें, यानी सभी प्रकार के ग्रह दोष, भूत-बाधाएँ और पिशाच-बाधाएँ समाप्त करें।सभी प्रकार के ज्वरों (बुखारों) को नष्ट करें। इसमें विशेष रूप से नाम लिया गया है: भूत-ज्वर (बाधा से उत्पन्न), एकाहिक-ज्वर (एक दिन छोड़कर आने वाला), द्वयाहिक-ज्वर (दो दिन छोड़कर), त्र्याहिक-ज्वर (तीन दिन छोड़कर), चातुर्थिक-ज्वर (चौथे दिन आने वाला), संताप-ज्वर (मानसिक/शारीरिक कष्ट का), विषम-ज्वर (अनियमित), ताप-ज्वर (तेज गर्मी वाला), और माहेश्वर-वैष्णव-ज्वर (शिव या विष्णु शक्ति से उत्पन्न)।
  • यह अंश श्री हनुमान् वडवानल स्तोत्र का अत्यंत शक्तिशाली और क्रियात्मक भाग है, जिसमें विभिन्न प्रकार के बीज मंत्रों और आज्ञाओं का प्रयोग करते हुए हनुमान जी से भक्तों की रक्षा और शत्रुओं के विनाश का कार्य करने का निवेदन किया गया है।
  • ह श्लोक एक बार फिर “ॐ ह्रां ह्रीं ॐ” के साथ भगवान महा-हनुमान को नमस्कार करता है, और उनसे अनेक प्रकार के संकटों को दूर करने का निवेदन करता है:

    सर्व-ग्रहोच्चाटन: वे सभी प्रकार के ग्रह-दोषों (ग्रहों की बाधाओं) को दूर करें। परबलं क्षोभय क्षोभय: शत्रु सेना या दूसरे के बल को क्षुब्ध (हिला दें/परेशान कर दें) करें। 

    नागपाश से संबंधित अनन्त, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, कालिया जैसे नागों को—तथा यक्षों के कुल, जगत (संसार में घूमने वाले) रात्रिञ्चर (रात में चलने वाले), दिवाचर (दिन में चलने वाले) सर्पों को—निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा (इन सभी को विष रहित कर दें)।

  • ह मंत्र हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि वे सभी प्रकार के बाहरी भय (सरकारी या चोरों से), शत्रुता और दूसरों द्वारा किए गए सभी प्रकार के तंत्र-मंत्र, जादू-टोने और बुरी विद्याओं का विनाश करें। साथ ही, यह विशेष रूप से आग्रह करता है कि हनुमान जी असंभव या कठिन से कठिन कार्यों को भी सिद्ध करने में सहायता करें।

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.

Kanakdhara Yantra Pyramid 3D (4 Inch Approx)
Kanakdhara Yantra Pyramid 3D (4 Inch Approx)
₹1999₹807
Shop Now
Remedywala Vastu Shriparni Wooden Strip (10Inch)
Remedywala Vastu Shriparni Wooden Strip (10Inch)
₹3993₹996
Shop Now
Shriparni Sriyantra With Kamal Aasan
Shriparni Sriyantra With Kamal Aasan
₹2999₹1905
Shop Now
Energized Brahma Pyramid Single Grid with sriparni Wooden Plate
Energized Brahma Pyramid Single Grid with sriparni Wooden Plate
₹1999₹999
Shop Now
Shriparni Tri Shakti (Swastik Trishul Om) (Pair)
Shriparni Tri Shakti (Swastik Trishul Om) (Pair)
₹399₹225
Shop Now
Energized Shriparni Wooden Pyramid (6Inch – Hollow Inside)
Energized Shriparni Wooden Pyramid (6Inch – Hollow Inside)
₹996₹726
Shop Now

Related Post

Categories
Archives

वडवानल स्तोत्रम् क्या है?

“वडवानल” का अर्थ है—समुद्र के भीतर की प्रचंड अग्नि। इस स्तोत्र में हनुमान जी को उस अग्नि की तरह बताया गया है जो सभी संकटों को जलाकर समाप्त कर देती है। यह स्तोत्र भगवान हनुमान की अपार शक्ति और उनकी कृपा की महिमा का वर्णन करता है।

Hanuman Vadvanal Stotra

-ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः,
श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं,
मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थे,
सकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम्,
आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थं,
श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये।

ध्यान
-मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।

-ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम
सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय
वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्र
उदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्र
अञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकार
सुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद
सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन डाकिनी-शाकिनी-विध्वंसन

-ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महावीर-वीराय सर्व-दुःखनिवारणाय
ग्रह-मण्डल सर्व-भूत-मण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन
भूत-ज्वर-एकाहिक-ज्वर, द्वयाहिक-ज्वर, त्र्याहिक-ज्वर
चातुर्थिक-ज्वर, संताप-ज्वर, विषम-ज्वर, ताप-ज्वर,
माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्म-राक्षस
भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।

– ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां
ॐ सौं एहि एहि ॐ हं ॐ हं ॐ हं ॐ हं
ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते श्रवण-चक्षुर्भूतानां
शाकिनी डाकिनीनां विषम-दुष्टानां सर्व-विषं हर हर
आकाश-भुवनं भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय
शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय
प्रहारय प्रहारय शकल-मायां भेदय भेदय स्वाहा।

– ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते सर्व-ग्रहोच्चाटन
परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु
शिरः-शूल गुल्म-शूल सर्व-शूलान्निर्मूलय निर्मूलय
नागपाशानन्त-वासुकि-तक्षक-कर्कोटकालियान्
यक्ष-कुल-जगत-रात्रिञ्चर-दिवाचर-सर्पान्निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा।

– ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-हनुमते
राजभय चोरभय पर-मन्त्र-पर-यन्त्र-पर-तन्त्र
पर-विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासयनाशय
नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा।।।

इति विभीषणकृतं हनुमद् वडवानल स्तोत्रं ।।

  • इस श्री हनुमान् वडवानल स्तोत्र मंत्र के ऋषि (रचयिता/द्रष्टा) श्रीरामचन्द्र हैं, इसकी देवता (अराध्य) श्रीहनुमान् वडवानल हैं। इसमें ‘ह्रां’ को बीज (मूल शक्ति), ‘ह्रीं’ को शक्ति (ऊर्जा), और ‘सौं’ को कीलक (स्थायित्व प्रदान करने वाला तत्व) माना गया है।
  • यह श्लोक भगवान हनुमान जी के स्वरूप, गुणों और उनकी विशेषताओं का वर्णन करता है, और अंत में उनके चरणों में शरणागति (आश्रय) लेने की अभिव्यक्ति है। इस श्लोक का अर्थ है: मैं उन हनुमान जी की शरण लेता हूँ|
  • यह स्तोत्र-अंश शक्तिशाली बीजाक्षरों “ॐ ह्रां ह्रीं ॐ” के साथ भगवान श्री महा-हनुमान को नमस्कार करता है, जो अपने प्रकट पराक्रम (प्रत्यक्ष शक्ति) के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी कीर्ति (यश) रूपी विस्तार ने समस्त दिशाओं और तीनों लोकों को उज्जवल कर दिया है। उन्हें वज्र के समान देह वाला रुद्रावतार (शिव का अंश) बताया गया है। 
  • यह श्लोक “ॐ ह्रां ह्रीं ॐ” बीजाक्षरों के साथ भगवान महावीर वीर हनुमान जी को नमस्कार करता है, जिनका मुख्य उद्देश्य सभी दुःखों का निवारण करना है। इस मंत्रांश में हनुमान जी से विशेष रूप से यह प्रार्थना की गई है कि वे: ग्रह-मण्डल, सर्व-भूत-मण्डल, सर्व-पिशाच-मण्डलों का उच्चाटन (उखाड़ फेंकना या दूर करना) करें, यानी सभी प्रकार के ग्रह दोष, भूत-बाधाएँ और पिशाच-बाधाएँ समाप्त करें।सभी प्रकार के ज्वरों (बुखारों) को नष्ट करें। इसमें विशेष रूप से नाम लिया गया है: भूत-ज्वर (बाधा से उत्पन्न), एकाहिक-ज्वर (एक दिन छोड़कर आने वाला), द्वयाहिक-ज्वर (दो दिन छोड़कर), त्र्याहिक-ज्वर (तीन दिन छोड़कर), चातुर्थिक-ज्वर (चौथे दिन आने वाला), संताप-ज्वर (मानसिक/शारीरिक कष्ट का), विषम-ज्वर (अनियमित), ताप-ज्वर (तेज गर्मी वाला), और माहेश्वर-वैष्णव-ज्वर (शिव या विष्णु शक्ति से उत्पन्न)।
  • यह अंश श्री हनुमान् वडवानल स्तोत्र का अत्यंत शक्तिशाली और क्रियात्मक भाग है, जिसमें विभिन्न प्रकार के बीज मंत्रों और आज्ञाओं का प्रयोग करते हुए हनुमान जी से भक्तों की रक्षा और शत्रुओं के विनाश का कार्य करने का निवेदन किया गया है।
  • ह श्लोक एक बार फिर “ॐ ह्रां ह्रीं ॐ” के साथ भगवान महा-हनुमान को नमस्कार करता है, और उनसे अनेक प्रकार के संकटों को दूर करने का निवेदन करता है:

    सर्व-ग्रहोच्चाटन: वे सभी प्रकार के ग्रह-दोषों (ग्रहों की बाधाओं) को दूर करें। परबलं क्षोभय क्षोभय: शत्रु सेना या दूसरे के बल को क्षुब्ध (हिला दें/परेशान कर दें) करें। 

    नागपाश से संबंधित अनन्त, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, कालिया जैसे नागों को—तथा यक्षों के कुल, जगत (संसार में घूमने वाले) रात्रिञ्चर (रात में चलने वाले), दिवाचर (दिन में चलने वाले) सर्पों को—निर्विषं कुरु-कुरु स्वाहा (इन सभी को विष रहित कर दें)।

  • ह मंत्र हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि वे सभी प्रकार के बाहरी भय (सरकारी या चोरों से), शत्रुता और दूसरों द्वारा किए गए सभी प्रकार के तंत्र-मंत्र, जादू-टोने और बुरी विद्याओं का विनाश करें। साथ ही, यह विशेष रूप से आग्रह करता है कि हनुमान जी असंभव या कठिन से कठिन कार्यों को भी सिद्ध करने में सहायता करें।

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.

My Cart
Wishlist
Recently Viewed
Categories