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    Guru Nanak ji ki Aarti | गुरुनानक जी की आरती | Gagan Mein Thaal Aarti

    गुरुनानक जी की आरती गगन में थालु रवि चंदु दीपक। बने तारिका मण्डल जनक मोती।। धूपमल आनलो पवणु चवरो करे। सगल बनराई फूलंत जोति ।। कैसी आरती होई भवखंडना तेरी आरती। अनहता सबद बाजंत भेरी रहाउ।। सहस तव नैन नन नैन है ‍तोहि कउ। सहस मू‍रती मना एक तोही।। सहस पद विमल रंग एक पद […]

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